Tuesday, 21 April 2015

चंचल खुशनुमा होती है बेटिया

बहुत "चंचल" बहुत"खुशनुमा " सी होती है
"बेटिया". "नाज़ुक" सा "दिल" रखती है
"मासूम" सी होती है "बेटिया".
"बात" बात पर रोती है"नादान" सी होती है
 "बेटिया". "रेहमत" से "भरपूर""खुदा" की "लाड़ली " है "बेटिया".
 "घर" महक उठता हैजब "मुस्कराती" हैं "बेटिया".
 "अजीब" सी "तकलीफ" होती है जब "दूसरे"
  घर जाती है "बेटियां". "घर"
लगता है सूना सूना "कितना"
 रुला के "जाती" है "बेटियां"
"ख़ुशी" की "झलक""बाबुल" की "लाड़ली" होती है
 "बेटियां" ये "हम" नहीं "कहते"यह तो "रब " कहता है. .
 क़े जब मैं बहुत खुश होता हु तो "जनम" लेती है"प्यारी सी बेटियां

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