Tuesday, 30 June 2015

बदलाव के तूफान छुपे होते हैं!

एक ऐसा जाम जिसमें आजादख्याली की हाला भरी होगी। एक ऐसा मंच जिस पर उन्मुक्त विचारों के नग्मे गूजेंगे। जिस पर उड़ने के तलबगार पंछियों को बांधने के लिए कोई पिंजरा नहीं होगा। सुबह की उंगलियों में थमा गुनगुनी चाय का कप हो, ऑफिस की व्यस्तताओं में राहत देने वाला कॉफी का मग हो या किसी सुकरात के हाथों में धरा हलाहल का पैमाना, इन्हीं नन्ही प्यालियों में ही तो अक्सर सुकून के या बदलाव के तूफान छुपे होते हैं!

Sunday, 28 June 2015

गजब! बिल्ली को बनाना चाहते हैं अपनी घरवाली

न्यूयार्क : जर्मन फैशन डिजाइनर कार्ल लेगरफेल्ड को प्यार हो गया है और वह शादी भी करना चाहते हैं, लेकिन प्यार किसी लड़की से नहीं हुआ बल्कि अपनी सफेद रंग की सियामी बिल्ली चोपेट से हुआ। लेगरफेल्ड के अनुसार चोपेट उनके जीवन का प्यार है।
न्यूयार्क पोस्ट की खबर के अनुसार लेगरफेल्ड ने कहा, ‘‘इंसानों और जानवरों के बीच अब तक शादियां नहीं होतीं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं इस तरह किसी बिल्ली के साथ प्यार में पड़ जाउंगा।’’ वैसे लेगरफेल्ड की बिल्ली किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं है, उसके ट्विटर पर 27,000 फॉलोअर हैं।

11 माह की बिटिया के साथ योग करती हैं गिजेल बंडचेन

लॉस एंजिलिस : सुपर मॉडल गिजेल बंडचेन अपनी 11 माह की बिटिया विवियन लेक ब्रैडी के साथ योग करती हैं। ई ऑनलाइन की खबर में कहा गया है कि बंडचेन ने बिटिया के साथ योग करते हुए एक तस्वीर भी इन्स्टाग्राम पर डाली है। तस्वीर में मां-बेटी एक ही मुद्रा में नजर आ रही हैं। यह बात अलग है कि दोनों ने अपने हाथ उपर उठाए हुए हैं। तस्वीर के नीचे बंडचेन ने कैप्शन डाला है धन्यवाद फाफी, इस खास मौके को तस्वीर में कैद करने के लिए। 33 वर्षीय बंडचेन ने तस्वीर में अपनी आंखें बंद की हुई हैं और उनकी बिटिया सामने देखते हुए मुस्कुरा रही है।

मॉडल एशलीन होर्गेन-वॉलेस हुई निर्वस्त्र














मॉडल एशलीन होर्गेन-वॉलेस ने एक कामोत्तेजक फोटोशूट के लिए निर्वस्त्र पोज दिया। इस दौरान वह केवल ऊंची एड़ी की जूती में नजर आईं।
वेबसाइट मिरर डॉट को डॉट यूके के मुताबिक 36 वर्षीय मॉडल ने फोटोशूट के दौरान केवल काली जूती पहनी हुई थी और उनके बदन के किनारे आकर्षक टैटू से कवर किए हुए थे जबकि अपनी छाती को उन्होंने हाथों से ढका हुआ था। इस दौरान मॉडल का पृष्ठ भाग सुनहरे बालों से घिरा था और उनके होठों पर लाली थी।

मिस इंडिया कोयल का अगला लक्ष्य मिस वर्ल्ड और बॉलीवुड





लंदन : दक्षिण अफ्रीका की सुंदरी रोलीन स्ट्रॉस को आज इस साल के मिस वर्ल्ड खिताब से नवाजा गया, जबकि भारत की कोयल राणा शीर्ष 10 सुंदरियों में ही अपना स्थान बना सकीं।
लंदन में हुई इस प्रतियोगिता में मिस हंगरी एदिना कुलसर दूसरे और मिस अमेरिका एलिजाबेथ सैफरिट तीसरे स्थान पर रहीं। इस सौंदर्य प्रतियोगिता के आज के प्रसारण को करोड़ों दर्शकों ने देखा।
आखिरी बार भारत की प्रियंका चोपड़ा ने साल 2000 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीता था। जयपुर में पैदा हुईं 21 वर्षीय कोयल शीर्ष 10 सुंदरियों में शामिल हुईं, लेकिन आखिरी पांच में जगह नहीं बना सकीं।
फाल्गुनी एंड शेन पीकॉक गाउन पहनीं कोयल ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिजाइनर का उप खिताब जीता। उन्होंने ‘ब्यूटी विथ ए परपज’ का खिताब भी कीनिया, गुयाना, ब्राजील और इंडोनेशिया की सुंदरियों के साथ साझा किया।
इस कार्यक्रम के बाद कोयल ने कहा, ‘मैं इस शानदार सफर के दौरान मिले सहयोग के लिए मिस इंडिया आर्गनाइजेशन, अपने परिवार और दोस्तों की बहुत आभारी हूं। यह एक अद्भुत अनुभव रहा।’

Wednesday, 24 June 2015

गुस्से से मैं घर से चला आया

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया .. इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ... जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है ..... आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था .... जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे ... मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी .... पता तो चले कितना माल छुपाया है ..... माँ से भी ... इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को.. जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है .... मैंने जूता निकाल कर देखा ..... मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था ... जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था .. और मुझे जाना ही था घर छोड़कर ... जैसे ही कुछ दूर चला .... मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था .... पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था ..... जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी ..... मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये .... मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था.. लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ? दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ...... ओह....अच्छे जुते पहनना ??? पर उनके जुते तो ...........!!!! माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो ... और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे .." मैं अब समझा कितने चलेंगे ......तीसरी पर्ची .......... पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये ... पढ़ते ही दिमाग घूम गया..... पापा का स्कूटर ............. ओह्ह्ह्ह मैं घर की और भागा........ अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी .... मैं घर पहुंचा ..... न पापा थे न स्कूटर .............. ओह्ह्ह नही मैं समझ गया कहाँ गए .... मैं दौड़ा ..... और एजेंसी पर पहुंचा...... पापा वहीँ थे ............... मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया .. .....नहीं...पापा नहीं........ मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल... बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है.. वो भी आपके तरीके से ...।। "माँ" एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है... और "पापा" एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है

एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए

एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया।
खाने के दौरान वृद्ध और कमजोर पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया।
रेस्टॉरेंट में बैठे दुसरे खाना खा रहे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था।
खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया। उसके कपड़े साफ़ किये, उसका चेहरा साफ़ किया, उसके बालों में कंघी की, उसे चश्मा पहनाया और फिर बाहर लाया।
सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे। बेटे ने बिल पे किया और वृद्ध के साथ बाहर जाने लगा। तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा---" क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?? " बेटे ने जवाब दिया---" नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर नहीं जा रहा। " वृद्ध ने कहा---" बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो, प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए उम्मीद

Tuesday, 23 June 2015

जीवन कॆ दिन ऎसॆ बीतॆ,पल-पल हारॆ पल-पल जीतॆ

जीवन कॆ दिन ऎसॆ बीतॆ,पल-पल हारॆ पल-पल जीतॆ !!
उथल-पुथल कॆ दिवस रात थॆ,बड़ी निराली उस की माया,
साथ-साथ थॆ सुख-दुख दॊनॊं,घट-घट प्यासा पनघट पाया,
चातक तृष्णा मानॆ कैसॆ,सुधा भरॆ घट झटपट रीतॆ !!
जीवन कॆ दिन ऎसॆ बीतॆ,पल-पल,,,,,
छाँव सुलानॆ आ गई अगर,घर पर जानॆ अनजानॆ मॆं,
धूप खड़ी हॊ जाती आ कर,उस सॆ पहलॆ सिरहानॆ मॆं,
तुम्ही बताऒ आखिर मॆं हम,कैसॆ मरतॆ कैसॆ जीतॆ !!
जीवन कॆ दिन ऎसॆ बीतॆ,पल,,,,,,
सहन नहीं हॊ पाता था यह, तब अपनी भी तरुणाई थी,
आँख मिचौली कह लॊ वरना,किस्मत की हाथा-पाई थी,
अमिय संग हम गरल गटागट,बड़ॆ मजॆ सॆ रहतॆ पीतॆ !!
जीवन कॆ दिन ऎसॆ बीतॆ,पल,,,,,
कभी चैन की नगरी मॆं हम,कभी दर्द कॆ मुख द्वारॆ पर,
अपनॆ मन की नहीं चली थी,हम चलतॆ रहॆ इशारॆ पर,
नॊंच रहॆ थॆ अगल बगल सॆ,राग द्वॆष कॆ खूनी चीतॆ !!
जीवन कॆ दिन ऎसॆ बीतॆ,पल,,,,,

बॆटियॊं का बाप हूँ मैं जानता हूँ सच सुनों,

सूख जाते फ़ूल पत्तॆ शाख़ भी हिलती नहीं !!
क्यूँ ग़रीबी कॆ बगीचॆ मॆं कली खिलती नहीं !!
बॆटियॊं का बाप हूँ मैं जानता हूँ सच सुनों,
आज कॆ इस दौर मॆं बॆटी सहज पलती नहीं !!
बात करतॆ हॊ यहाँ अच्छॆ दिनॊं की तुम बहुत,
तीरग़ी सॆ है भरी यॆ रात क्यूँ ढलती नहीं !!
दॆख लॊ मुझकॊ तुम्हारॆ मुल्क का मज़दूर हूँ,
आज भी मुझकॊ ज़िया-ए-रॊशनी मिलती नहीं !!
आसमां की छांव मॆं दिन रात बीतॆ ‘राज़’ के,
तल्ख़ियॊं की आग से माँ की दुआ जलती नहीं !!

प्रीत के बदले प्रीत निभाना, सबके बस की बात नहीं

प्रीत के बदले प्रीत निभाना, सबके बस की बात नहीं 
गीत के साज सजाए दिल से, सबके बस की बात नही !   
गायक तन्हाई का, शम्मा महफिल की बन जाता हूँ 
 बुझते दिल के दीप जलाए,सबके बस की बात नही ! 
 जरा सी तन्हाई मन को, कितना व्याकुल कर जाती
 तन्हाई का जश्न मनाये, सबके बस की बात नही ! 
 दर्द मिले जो दर्द को जाना, गीत दर्द बन गाता हूँ 
 सबके दर्द में अश्क बहाये, सबके बस की बात नही ! 
 कोई बुराई सबमें सबको, दिख जाये 
आसानी से खुद में छिपी बुराई देखे, सबके बस की बात नही ! 
जीने को सब जी लेते हैं, जीवन के अहसासों से 
 मौत के बाद भी जिन्दा हो, सबके बस की बात नही !!
 रंग से रंग मिलाने आते योगी होली के बहाने से 
 से दिल का रंग मिलाये, सबके बस की बात नहीं !! यह रचना क्यों ?
जिंदगी खुद में पल-पल खामोश आती एक मौत है.
पल को जी लेना और आने वाले हर पल के मौत 
को जिंदा कर जाना,
 सच सके बस की बात नही .

एहसास बस रोंगटे खड़े कर दे |

साफ सुथरे शहर
की तरह उनका चरित्र
खूब भ्रमण किया
उनके व्यवहारिक जीवन में |
दिल में उनके भी कई फू
खिले मिले खुशबू मादक एकदम
 स्वर्ग की अनुभूति लगी |
बैठे एक कोने में दिल के उनकी
जुल्फें घनी बादल की तरह छा गई
एकदम से देख भाव विभोर हुए |
बरस गया उनका प्रेम मुझपर
मूसलाधार ऐसे भींगे
मन और हम भी गीले
एहसास बस रोंगटे खड़े कर दे |

आँसू वही हैं पर बहने के अंदाज नए है

पानी के कुछ बुलबुलों में दुनिया जहान को डूबते देखा है,
सभ्यता की नई गलियों में इन्सान को मिटते देखा है,
गूँज वही है पर साज़ नए हैं,
आँसू वही हैं पर बहने के अंदाज नए है,
कितने अनजाने आए और मित्र बन गए,
और कुचले हुए गुलाब भी ईत्र बन गए,
पर आने वाले वक्त को किसने देखा है,
सभ्यता की नई गलियों में इन्सान को मिटते देखा है ।
जिन सवालों को लेकर चले थे, जब उनके जवाब हीं बेमाने हो गए,
तो खुद ब खुद बंद होने लगीं खिड़कियाँ,
लोग कितने सयाने हो गए,
दिल हो गए पत्थर के जब से,
मैने खुद को दीवारों से बातें करते देखा है,
सभ्यता की नई गलियों में इन्सान को मिटते देखा है ।
ना वैसे कभी चली थी ,ना वैसे कभी चलेगी,
जैसा हम दुनाया के बारे में सोचते है,
फिर क्यों कभी खुद को कभी दुनिया को कोसते है,
अगर मीरा जैसे बनेंगे दीवाने ,
फिर लोग तो मारेंगे हीं ताने,
पर वक्त ने उसी दुनिया को उसके पैरों पर गिरते देखा है,
सभ्यता की नई गलियों में इन्सान को मिटते देखा है ।

हमे देने वाले हर प्रेमी को झुकना हीं पड़ता है,

हम वो गुलाब है जो टूट कर भी मुस्कान छोड़ जाते हैं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं ।
दुनिया के प्रेम प्रसंगो में हम गुलाबों को टूटना हीं पड़ता है,
और हमे देने वाले हर प्रेमी को झुकना हीं पड़ता है,
कभी हमे फरमाइश कभी नुमाइश बना दिया,
जी चाहा ज़ुल्फों में लगाया,जी चाहा सेज़ पे सज़ा दिया,
 मेरे तन को छेड़ कर , दीवाने कैसे मचल जाते हैं,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं ।
 बात अभी इतनी होती तो क्या बात थी,
पर अभी और भी काली होने वाली रात थी,
मेरे अरमानों को कुचल कर इत्र बना दिया,
और दिखावटी शिशियों में भर कर सजा दिया,
हम मर कर भी साँसों में महक छोड़ जाते है,
दुसरों के रिश्ते बनाते फिरते हैं और खुद तन्हा रह जाते हैं ।

Monday, 22 June 2015

प्रिया इसे शादी के रिकॉर्ड के तौर पर रखना।

प्रिया और हितेश की शादी हुई। शादी पूरी होने के बाद प्रिया की मां ने उसे 1000 रुपये जमा के साथ एक नए खाते की पासबुक दी।
मां: प्रिया इसे शादी के रिकॉर्ड के तौर पर रखना। जब कुछ अच्छा हो तो बैंक में कुछ पैसे जमा करके पासबुक में उसके सामने खुशी की एंट्री करना। शुरुआत मैंने कर दी है। अब तुम इसे हितेश के साथ पूरी करना।
प्रिया ने घर आने पर हितेश को बताया। उसे भी विचार पसंद आया। वे दोनों सोचने लगे कि अब कब दूसरी एंट्री होगी। कुछ समय बाद इस तरह एंट्री होने लगी..
7 फरवरी: 100 रुपये, शादी के बाद हितेश की पहली जन्मदिन पार्टी।
1 मार्च: 300 रुपये। प्रिया के वेतन में बढ़ोतरी।
20 मार्च: 200 रुपये, बाली की सैर। 15 अप्रैल: 2000 रु. माता-पिता बनना।
सालों तक इसी तरह एंट्री होती रही। लेकिन समय बदला। बाद में वे छोटी-छोटी बातों पर लड़ने लगे।
आपस में उनकी बातें भी कम हो गयीं। उन्हें लगने लगा कि दोनों साथ नहीं रह सकते। प्रिया ने अलग होने की बात अपनी मां को बतायी।
मां: कोई बड़ी बात नहीं। जो चाहती हो, वही करो। पर पहले एक काम करो। अपनी शादी वाली पासबुक ले आओ। अब उसका कोई इस्तेमाल नहीं। इसलिए वो खाता बंद कर दो। प्रिया को बात सही लगी। वह बैंक गयी और लाइन में खड़ी बारी का इंतजार करने लगी। वह अपनी पासबुक पलटने लगी। एक-एक करके मन खुशियों से भर गया। आंखों में आंसू आने लगे। उसने घर आकर हितेश को वह पासबुक दी और कहा कि तलाक से पहले यह खाता बंद करा दो। 
अगले दिन हितेश ने पासबुक प्रिया को दी। उसमें 5000 रुपये की एक नई एंट्री थी। उसके सामने लिखा था, 'आज मैंने जाना कि इतने सालों में मैंने तुम्हें कितना प्यार किया है। वे गले मिलकर रोने लगे। पासबुक को फिर से नयी एंट्री के लिए सुरक्षित रख दिया। 00

Friday, 19 June 2015

वर्षों किया इंतजार मैंने पर तू पल भर भी न ठहर

एक इशारा तो किया होता ,कब मैं तुमसे दूर थी
तुमने हाथ तभी माँगा जब हो चुकी मजबूर थी
वर्षों किया इंतजार मैंने पर तू पल भर भी न ठहर
सका पूरा किया वो काम जो न कर कभी
जहर सका सब कुछ भुला दिया इस कदर
की ना मेरा नाम याद रखा मैं बेवफा हूँ
ये इल्जाम याद रखा कभी तो लौट के
आओगे जाने क्यों ये भरोसा था
प्यार का तूफ़ान समझा जिसे वो
तो बस एक चाहत का झोकां था
प्यार नहीं एहसान सही ,थोड़ी दया दिखाने आ जाते
अभी भी छुपे हैं दिल में अरमान कई ,
एक ठोकर लगाने आ जाते

जाते जाते इतना तो रहम किया होता

इन आँखों के सैलाब से दो बूंद पानी मांग लेते तुम्हे हक़ था मेरी जवानी मांग लेते जाते जाते इतना तो रहम किया होता कि मुझसे अपनी वो प्यार की निशानी मांग लेते

मास्टर तो सारे बच गये

एक बार एक स्कूल मे आग लग गई।
स्कूल की छुट्टी हो गई ।
सब बच्चे स्कूल से घर ख़ुशी ख़ुशी जा रहे थे।
खुश इसलिए की स्कूल मे आग लग गई।
अब स्कूल में नही आना पड़ेगा।
लेक़िन एक बच्चा बड़ा दुखी होकर स्कूल से जा रहा था।
टीचर ने उसको देखा उसे अपने पास बुलाया
और पूछा बेटा सब बच्चे तो इतने ख़ुश हँ ।
लेकिन तुम दुखी क्यों हो।
लड़का बोला आग से स्कूल ही तो जला हँ।
मास्टर तो सारे बच गये।
कल पार्क मे बिठाकर पढ़ाने लगेंगे।

Thursday, 18 June 2015

शायद जिन्दगी के मतलब तलाश रही है,

हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में, 
वह सवेरा आता भी है तो बस कुछ वादे करने के लिए , 
छोड़ जाता है सारा दिन आशा के दिए तले जलने के लिए, 
शाम होते हीं फ़िर दिन ढल जाता है अपने सारे वादे तोड़ कर एक हीं बार में, 
और फ़िर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में ।

बस इन्तज़ार इन्तज़ार अब और कितना,
दिल में घुटन सागर जितना, गुमसुम है वो,
शायद जिन्दगी के मतलब तलाश रही है, 
अपनी सांसो का मकसद ढुढने खातिर सारी सारी रात जाग रही है, 
क्यों इस कशमकिश के बिना अधुरी है कहानी उसकी, 
कोई समझा दे अकसर ऐसा हीं होता है प्यार में , 
हर रात सिसकती बिलखती रह जाती है एक नये सुबह के इन्तज़ार में ।

गैर की गलियां झूम रही मेरे हीं शहनाईयों से

हर एक पल बेखबर है इश्क की परछाइयों से,
गैर की गलियां झूम रही मेरे हीं शहनाईयों से,
अब मुड़ कर कभी ना देखना,
कि दामन मेरा कैसे भींज रहा आँसुओ की विदाईयों से,
ना कभी मिलने की एक और कसम खा लें हम,
ये हम नहीं हमारे दिल कह रहे हैं,
देखो तो कितने खुश है सभी,
जहाँ फूटती थी चिंगारियाँ वहाँ फूल खिल रहे है,
 रहने भी दो वो प्यार, वो सुहाना सफर,
वो अनछुई मंजिले, तेरे वादे और ईरादे सब बेमाने लग रहे है,
रास्ते बंद ना हुवे हो बेशक मगर,
मेरी तम्नाओं के पग थक गये हें।

बेबसी हँस रही थी मुझ पर कायरता का इल्जाम लगा के

मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी, 
कुछ अधुरे सपने ,मेरी मुश्किलें ,
मेरी कठनाई थी, मैं अकेला कब था ,
मैं था और मेरी तनहाई थी ।

मेरे भावनाओं से खेला मेरे ऊसुलों का दाम लगा के, 
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी, 
कुछ अधुरे सपने ,मेरी मुश्किलें ,मेरी कठनाई थी, 
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी । 

मेरे भावनाओं से खेला मेरे ऊसुलों का दाम लगा के,
बेबसी हँस रही थी मुझ पर कायरता का इल्जाम लगा के, 
चुप था मैं पर लड़ रही सबसे मेरी परछाई थी, 
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी । 

समय ने कर के तीमिर से मंत्रणा,हर ज्योति को बुझा दिया,
स्वाभीमान के कर के टुकड़े-टुकड़े मझे घूटनों में ला दिया, 
हर तरफ़ से मिल रही बस जग हँसाई थी, 
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी । 

जब देखा स्वयं को आईने में ,मैं टूट चूका था हर मायने में,
स्थिल कर रहा सोंच को ये बिन आग का कैसा धुआँ है,
ध्यान से देखा ,ओह ये आइना टूटा हुआ है,
और यही सोंच बन के जीत लेने लगी अँगड़ाई थी,
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी ।
बेबसी हँस रही थी मुझ पर कायरता का इल्जाम लगा के, 
चुप था मैं पर लड़ रही सबसे मेरी परछाई थी, 
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी । 

समय ने कर के तीमिर से मंत्रणा,हर ज्योति को बुझा दिया, 
स्वाभीमान के कर के टुकड़े-टुकड़े मझे घूटनों में ला दिया, 
 हर तरफ़ से मिल रही बस जग हँसाई थी,
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी । 

जब देखा स्वयं को आईने में ,मैं टूट चूका था हर मायने में,
स्थिल कर रहा सोंच को ये बिन आग का कैसा धुआँ है, 
ध्यान से देखा ,ओह ये आइना टूटा हुआ है, 
और यही सोंच बन के जीत लेने लगी अँगड़ाई थी, 
मैं अकेला कब था ,मैं था और मेरी तनहाई थी ।

इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें

आओ इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें 
इस अंधेरे आज में सुनहरा कल ढूंढ लें, 
दो आँसु भी टपके तो मोती बन के, 
कोई तो ऐसी जगह ढूंढ लें, 
माना कि भरोसा नहीं आपको मेरी वफ़ाओं पर,
पर पास आने की कोई तो वजह ढूंढ लें, 
इस गुमसुम सफ़र में हँसी का कोई पल ढूंढ लें 
इस अंधेरे आज में सुनहरा कल ढूंढ लें ।

हर शाम भींगी रहे तेरे शबनम से कसम,

चाहे मेरी चाहत को मोहब्बत का नाम ना दे, 
पर अपने रुप तूफ़ान में बिखर जाने से ना रोक मुझे, 
हर शाम भींगी रहे तेरे शबनम से कसम, 
एक बार सही प्यार से देख मुझे । 

थम के रह गई है जो एक झनक तनहा, 
अपने चाल की ताल पे फ़िर से थिरक जाने दे, 
शर्म की पनाह से निकल कर ईश्क को लेने दो अँगड़ाईयाँ, 
अपने जजबात को हालात से टकरा जाने दे । 

रहतीं हैं सलामत जहाँ प्यार की निशानियाँ सभी, 
मेरी बेकरारियों को अपने दिल में ठहर जाने दे, 
खुद को यूँ ना दो तुम सजा मुझसे नफ़रत करके’ 
है अगर ईश्क तो आँखो में उतर आने दे ।

है उसके शादी की रात और घना कोहरा ।

1. गुजारिशें जानीं कितनी की थी, 
पर ना हटाती थी झुल्फ़ें ना दिखाती थी चेहरा, 
आज जो दिखाई है चेहरा तो कोई और बाँधे बैठा है शेहरा,

है उसके शादी की रात और घना कोहरा ।
2. वह हमेशा कहती थी कि मैं उसके दिल के पास हूँ, 

मैं हमेशा सोंचता था कि दिल के पास क्यों दिल में क्यों नहीं, 
जरुर इसमें कुछ ऐब है,जब सर झुका कर देखा जो दिल को , 
अरे दिल के पास तो जेब है । 
3. दिल नहीं सराय कि आज ठहरे कल चल दिए, 
प्यार नहीं फ़ूल कि कभी बालों में लगाया कभी कुचल दिए, 
जा बेवफ़ा नहीं करना कोई शिकवा गिले, 
पर तू जहाँ भी जाए तुझको तेरा उस्ताद मेले ।

ख्यालों का कुछ ऐसा समां बंध गया है ,

ख्यालों का कुछ ऐसा समां बंध गया है , 
कि दर्द हीं दिल का दवा बन गया है , 
सपने बिखर रहे बन के रेत हाथों से , 
जो बचा था , 
कुछ धुंवा कुछ हवा बन गया है | 

मंजीलें थीं मेरी तेरे आस पास , 
पर जिस पे साथ चलते थे वो रासता किधर गया , 
जो ना डरता था ज़माने में किसी से, 
आज ख़ुद क्यों अपने आप से डर गया | 

 क्यों ये जानना ज़रूरी था की कौन सही , 
कौन ग़लत है, अब दूर होकर क्यों पास आने की तलब है, 
फ़िर से पुरानीं गलतियों को दोहराने को जी चाहता है , 
बदले की आरजू है या प्यार की कशीश है |

तुम हीं रुक जाओ की वक्त तो रुकता नहीं , 
क्यों ये पर्वत तो कभी झुकता नहीं , 
मेघ बनके बरस जाओ तुम मुझ पर , 
की ओस की बूंदों से प्यास बुझता नहीं | 

तूफ़ान है तूझमें मुझे टूटने बीखर जाने दो , 
इससे अच्छा और क्या मिल सकता सिला है , 
ख्यालों का कुछ ऐसा समां बंध गया है , 
की दर्द हीं दिल का दवा बन गया है |

Wednesday, 17 June 2015

झिल-मिल,झिल-मिल से लक्षद्वीप, जो चमक रहे तेरे गालों में

परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी !
सुन्दरता कश्मिर की तुममे ,सिक्किम जैसा शर्माती !!
:
खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली !
केरल जैसा आंख तुम्हारा ,है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !!
:
महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना !
खुशबू हो तुम कर्नाटक कि,बल तो तेरा हरियाना !!
:
सिधी-सादी ऊड़ीसा जैसी,एम.पी जैसा मुस्काना !
दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी ,त्रिपुरा जैसा इठलाना !!
:
झारखन्ड तुम्हारा आभूषण,तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है !
सीना तो तुम्हारा यू.पी है तो ,हिमांचल तुम्हारी निन्दिया है !!
:
कानों का कुन्डल छत्तीसगढ़ ,तो मिज़ोरम तुम्हारा पायल है !
बिहार गले का हार तुम्हारा ,तो आसाम तुम्हारा आंचल है !!
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 नागालैन्ड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारा अरुणांचल है !
नाम तुम्हारा भारत माता, तो पवित्रता तुम्हारा ऊत्तरांचल है !!
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सागर है परिधान तुम्हारा,तिल जैसे है दमन- द्वीव !
मोहित हो जाता है सारा जग,रहती हो तुम कितनी सजीव !!
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अन्डमान और निकोबार द्वीप,पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में !
झिल-मिल,झिल-मिल से लक्षद्वीप, जो चमक रहे तेरे गालों में !!
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ताज तुम्हारा हिमालय है ,तो गंगा पखारती चरण तेरे !
कोटि-कोटि हम भारत वासियों का ,स्वीकारो तुम नमन मेरे !!
॥जय भारत माता॥

जो अक्श वो तुम्हारा ही है!

मेरी आँखों मैं झाँक रहा है...
जो वो दर्द मेरा नही,तुम्हारा ही है!
ये ऑंखें तो आइना है...
दिख रहा है जो अक्श वो तुम्हारा ही है!

एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो

तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।
अर्थ : कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो
जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है.
यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है !

पति-पत्नी के जगडे में पत्नी कुछ बढ-चढकर बोल गई

पति-पत्नी के जगडे में पत्नी कुछ बढ-चढकर बोल गई |
पति ने अपना अधिकार जताते हुए कहा - मैं कहता हूं , अपने शब्द वापस ले लो |
पत्नी बोली - नहीं लेती |
पति ने फिर गुस्से में कहा - आखिरी बार कहता हूं
अपने शब्द वापस ले लो , मैं तुम्हें पांच मिनट का समय देता हूं |
पत्नी ने शांत भाव से पूछा - और अगर पांच मिनट के अंदर अपने शब्द वापस न लिए तो ?
पति ने कहा- अच्छा , तो तुम्हें कितना समय चाहिए ?

सभी साड़ियां तो मोहल्ले वालों ने देख ली हैं |

अंजलि - सुनिए जी, मुझे एक नई साड़ी दिला दीजिए न प्लीज |
अनिल - लेकिन तुम्हारी अलमारी तो साड़ियों से भरी पड़ी हैं, फिर नई क्यों ?
अंजलि - वे सभी साड़ियां तो मोहल्ले वालों ने देख ली हैं |
अनिल - हम साड़ी क्यों खरीदें, मोहल्ला ही बदल लेते हैं |

जब मैं उस कन्या के गया पास

कोर्ट में एक अजीब मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते को बांध कर लाया
सिपाही ने जब कटघरे में आकर कुत्ता खोला
कुत्ता रहा चुपचाप, मुँह से कुछ ना बोला..!
नुकीले दांतों में कुछ खून-सा नज़र आ रहा था
चुपचाप था कुत्ता, किसी से ना नजर मिला रहा था
फिर हुआ खड़ा एक वकील ,देने लगा दलील बोला,
इस जालिम के कर्मों से यहाँ मची तबाही है
इसके कामों को देख कर इन्सानियत घबराई है
ये क्रूर है, निर्दयी है, इसने तबाही मचाई है
दो दिन पहले जन्मी एक कन्या,
अपने दाँतों से खाई है अब ना देखो
किसी की बाट आदेश करके उतारो
इसे मौत के घाट जज की आँख हो गयी
लाल तूने क्यूँ खाई कन्या, जल्दी बोल डाल
तुझे बोलने का मौका नहीं देना चाहता लेकिन मजबूरी है,
अब तक तो तू फांसी पर लटका पाता जज साहब,
इसे जिन्दा मत रहने दो कुत्ते का वकील बोला,
लेकिन इसे कुछ कहने तो दो फिर कुत्ते ने मुंह खोला ,
और धीरे से बोला हाँ, मैंने वो लड़की खायी है
अपनी कुत्तानियत निभाई है कुत्ते का धर्म है
ना दया दिखाना माँस चाहे किसी का हो,
देखते ही खा जाना पर मैं दया-धर्म से दूर नही खाई तो है,
पर मेरा कसूर नही मुझे याद है,
जब वो लड़की छोरी कूड़े के ढेर में पाई थी और कोई नही,
उसकी माँ ही उसे फेंकने आई थी
जब मैं उस कन्या के गया पास उसकी आँखों में देखा भोला
विश्वास जब वो मेरी जीभ देख कर मुस्काई थी
कुत्ता हूँ, पर उसने मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई थी
मैंने सूंघ कर उसके कपड़े, वो घर खोजा था जहाँ माँ उसकी थी,
और बापू भी सोया था मैंने भू-भू करके उसकी
माँ जगाई पूछा तू क्यों उस कन्या को फेंक कर आई चल मेरे साथ,
उसे लेकर आ भूखी है वो, उसे अपना दूध पिला माँ सुनते ही रोने लगी
अपने दुख सुनाने लगी बोली, कैसे लाऊँ
अपने कलेजे के टुकड़े को तू सुन, तुझे बताती हूँ
अपने दिल के दुखड़े को मेरी सासू मारती है
तानों की मार मुझे ही पीटता है, मेरा भतार बोलता है
लङ़का पैदा कर हर बार लङ़की पैदा करने की है
सख्त मनाही कहना है उनका कि कैसे जायेंगी
ये सारी ब्याही वंश की तो तूने काट दी बेल जा
खत्म कर दे इसका खेल माँ हूँ, लेकिन थी
मेरी लाचारी इसलिए फेंक आई,
अपनी बिटिया प्यारी कुत्ते का गला भर गया
लेकिन बयान वो पूरे बोल गया....!
बोला, मैं फिर उल्टा आ गया दिमाग पर मेरे धुआं
सा छा गया वो लड़की अपना, अंगूठा चूस रही थी
मुझे देखते ही हंसी, जैसे मेरी बाट में जग रही थी
कलेजे पर मैंने भी रख लिया था पत्थर फिर भी काँप रहा था
मैं थर-थर मैं बोला, अरी बावली, जीकर क्या करेगी
यहाँ दूध नही, हर जगह तेरे लिए जहर है,
पीकर क्या करेगी हम कुत्तों को तो,
करते हो बदनाम परन्तु हमसे भी घिनौने,
करते हो काम जिन्दी लड़की को पेट में मरवाते हो
और खुद को इंसान कहलवाते हो मेरे मन में,
डर कर गयी उसकी मुस्कान लेकिन मैंने इतना तो लिया था
जान जो समाज इससे नफरत करता है
कन्याहत्या जैसा घिनौना अपराध करता है
वहां से तो इसका जाना अच्छा इसका तो मर जान
अच्छा तुम लटकाओ मुझे फांसी,
चाहे मारो जूत्ते लेकिन खोज के लाओ,
पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ,
पहले वो इन्सानी कुत्ते ..!!

मेरे कफन के किसी एक कोने में

मै मर भी जाऊँ
तो बस मेरी एक पहचान लिख देना ।
मेरे कफन के किसी एक कोने में
 !! जय श्री राम !! लिख दैना .

आप Bewakuf Ban Gaye.

अंधश्रद्धा की परिसीमा
एक आदमी को रास्ते में पत्थर दिखा.
उस पत्थर पे लिखा था
की 'इस को पलट दो, कुछ बन जाओगे.'
उसने पत्थर पलटा.
दुसरी तरफ लिखा था
की 'मुबारक हो.
आप Bewakuf Ban Gaye...

इंसानियत दिखाई ही नही देती।

मानवता मिटती जा रही है
दानवता हावी होती जा रही है।
संस्कारो की कमी है।
तास्मिकता इतनी बढ गई है
कि इंसानियत दिखाई ही नही देती।

जब आगोश में लिए तुमने

वो पल गुजरे कई सालो की दुआ थे
ये तो नहीं मालूम
जब आगोश में लिए तुमने
बस इतना ही एहसास हुआ
मुझे जैसे एक देह एक रूह हो हम

लड़कियों से क्या दोस्ती करना , जो पल भर में छोड़ जाती है

एक दोस्त ने नया मोबाइल खरीदा..!! 
राहुल : देख, राकेश मैने नया मोबाइल खरीदा..!!
राकेश : वाह.. क्या बात है, बंदा तेजी मेँ है.. 
आज पार्टी तो देनी पडेगी तुझे..! 
अगर पार्टी देगा तो मैँ भी तुझे एक Gift दुँगा..! 
राहुल : OK चल ठीक है
आज रात को Hotel मेँ पार्टी मेरी तरफ से.. (रात को दोनो Hotel मेँ मिलते है) 
राकेश : अरे यार तु इतना गरीब है, 
एक-एक रुपया इकठ्ठा करके मोबाइल खरीदा और अब पार्टी का इंतजाम कैसे किया..?
राहुल : पार्टी के लिए मोबाइल बेच दिया.. 
तेरे लिए तो जान भी दे दु तु कहे तो...! 
राकेश : मुझे पता था तु साला ऐसा ही कुछ करेगा...
इसलिए तुने जिस दुकान पर मोबाइल बेचा मैने वही से वापस खरीद कर लाया हु...
ले यह मेरी तरफ से"GIFT" मोरल :"जिँदगी मेँ दोस्त नही बल्कि दोस्त मेँ जिँदगी होनी चाहिए"
 I,,,,,,LovE,,,, ,,,,you,,,,mY,, ,aLL ,,,,,,F,,,,R,,, ,,I,,,,E,,,,N,, ,,,,D,,,,,,,S 
लड़कियों से क्या दोस्ती करना , जो पल भर में छोड़ जाती है , 
दोस्ती करनी है तो लड़को से करो , 
जो मरने के बाद भी कंधे पे ले जाते है .

Monday, 15 June 2015

पर्यटन पूरे साल भर अपने यौवन पर रहता है।

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) उन क्षेत्रों में से है जहां पर्यटन पूरे साल भर अपने यौवन पर रहता है। यहां का हर स्थल पर्यटन के लिहाज से अपने में खास है। लेकिन इनमें से कुछ जगहें ऐसी हैं, जिन्हें हर शख्स बार-बार देखने की तमन्ना रखता है। क्योंकि ये जगहें किसी भी सैलानी के मानसपटल पर प्रकृति के सौंदर्य और रोमांच का जो अफसाना लिख देती हैं, उसे कोई कभी भुला नहीं पाता है। ऐसी ही जगहों में से एक है किन्नौर जिले की सांगला घाटी जो अपने मनमोहक नजारों से किसी का भी दिल जीत लेती है।
शिमला (Shimla) को स्पीति से जोडने वाली नेशनल हाइवे 22 पर जब हम कडछम नामक स्थान पर पहुंचते हैं तो यहां से हम सांगला की ओर मुड जाते हैं, जो यहां से लगभग 18 किमी की दूरी पर पूर्व दिशा की ओर स्थित है। इसी स्थान से किन्नौर जिले का मुख्यालय रिकांगपियो 20 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा की ओर स्थित है। सांगला की ओर सफर करते हुए हम ब्रुआ, सापनी, सौंग, चांसु आदि गांवों से रू-ब-रू होते हैं। इनमें हर गांव का अपना खास महत्व है। ये सभी गांव सांगला सडक मार्ग के विपरीत बास्पा नदी के दूसरी तरफ पहाडियों पर बसे हैं। सबसे पहले मिलने वाला वाला ब्रुआ खूबसूरत व ऐतिहासिक गांव है। किन्नौर जिले से एकमात्र यह गांव है, जिसने हिमाचल पर्यटन विभाग के हर गांव की कहानी प्रोजेक्ट में स्थान पाया है। इसी दिशा में सांगला की ओर सौंग गांव है जो काला जीरा के लिए मशहूर है। उसके बाद सापनी और फिर चांसु गांव है। चांसु पत्थर की स्लेट के लिए जाना जाता है। इस गांव से निकलने वाली स्लेटों ने लगभग पूरे किन्नौर के घरों को ढका है। इस ओर सफर करते हुए बास्पा नदी हमारे साथ-साथ चलती है। इसलिए इस घाटी को बास्पा घाटी भी कहा जाता है। लगभग 95 किमी लंबी सांगला (बास्पा) घाटी किन्नौर की सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक है।
बांध लेता है सौंदर्य
 सांगला (Sangla Valley) बास्पा घाटी का सबसे बडा गांव है। यहां तक पहुंचने के लिए हमें उस खतरनाक सडक मार्ग से सफर करना होता है जो हमेशा दिल में इन ऊंचाइयों का डर बनाए रखता है। जब हम सांगला की सीमा पर दस्तक देते हैं तो इसके सौंदर्य को निहारते हुए आंखें खुली की खुली रह जाती है। कौन सोच सकता था कि इस खतरनाक रास्ते के पीछे भी एक ऐसी खूबसूरत दुनिया बसी हो सकती है जो हमें अपने मोहपाश में बांध देती है। जब हम सांगला पहुंचते हैं तो सबसे पहले हमें सांगला बाजार के दर्शन होते हैं जहां से हमें अपनी जरूरत की हर वस्तु हासिल हो पाती है। लकडी के बने मकान और उनकी शैली हमारे आकर्षण का केंद्र बनती है। लेकिन बदलते समय के साथ लोगों ने अब ईट-बजरी के मकान बनाने शुरू कर दिए हैं, जो सांगला की खूबसूरती को मानो ग्रहण लगाते प्रतीत होते हैं। सांगला व इसके आसपास के गांव सेब, खुमानी, चूली, बादाम, प्लम, अखरोट से लकदक रहते हैं। बैरिंग नाग सांगला के प्रमुख देवता हैं। सितंबर में देवता को समर्पित फुलैच मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में इस घाटी के अलावा किन्नौर भर से लोग आकर देवता के प्रति अपनी श्रद्धा एवं आस्था का परिचय देते हैं। बैरिंग नाग देवता की खासियत है कि यह देवता लोगों की जमीन-जायदाद से सबंधित फैसले लेते हैं। इनके फैसले सभी को मान्य होते हैं। पूरे किन्नौर में सांगला ही एक ऐसा क्षेत्र है जो इतनी ऊंचाई पर भी थोडा समतल है। गांव में सांगला का वह पहला स्कूल आज भी मौजूद है, जो अंग्रेजों द्वारा शुरू किया गया था। इसके साथ ही ऐतिहासिक व खूबसूरत जंगलात महकमे का विश्राम गृह भी है जिसका निर्माण अंग्रेजों द्वारा 1906 में करवाया गया था। सांगला से लगभग एक किमी दूर गंगारंग में शिव मंदिर है। जहां एक बडी चट्टान है जो दूर से देखने पर शंख की तरह दिखती है। इस स्थान से निकलने वाला पानी पवित्र माना जाता है, जो कई तरह के रोगों, खासकर चर्म रोगों के लिए औषधि का कार्य करता है। सांगला में जीरा फार्म भी है जहां जीरा और केसर उगाया जाता है। सांगला में भोजपत्र के पेड भी पाए जाते हैं। सांगला घाटी ट्रेकिंग के लिए भी काफी मशहूर है।
लकडी का किला
सांगला के साथ उत्तर दिशा की ओर लगता गांव है कामरु जो अपने में कई सदियों का इतिहास समेटे है। इस बात का गवाह यहां का लकडी से बना कामरु किला है। यहां तक रामपुर बुशहर रियासत का अधिपत्य हुआ करता था। यहां के प्रमुख देवता बद्री विशाल हैं, जो कामरु के लोगों की अटूट आस्था व श्रद्धा के प्रतीक हैं। सांगला के साथ बास्पा नदी को लांघकर दूसरी ओर कश्मीर गांव है। हरे-भरे जंगल से सजा यह गांव बहुत ही सुंदर है। इसी गांव में किन्नौर का एकमात्र ट्राउट मछली पालन केंद्र भी है जो यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का बिंदु है।
फलदार पौधों का गढ
सांगला के साथ ही दक्षिण दिशा की ओर लगता गांव है बोनिंग सारिंग। यह गांव भी सेब, खुमानी, चूली, चिलगोजा, अखरोट, पलम आदि के पेडों से भरपूर है। हम यहां से बसपा नदी के उस पार दूसरे बडे और सुंदर, स्वच्छ गांव बटसेरी पहुंचते हैं। इस गांव के लिए हम लकडी का बना वह पुल पार करते हैं जो कुशल कारीगरों की तकनीक का बेजोड नमूना पेश करता है। बटसेरी गांव हल्की सी ढलान पर बसा बहुत ही सुंदर गांव है। यह गांव भी फलदार पौधों से भरपूर है। इस गांव के देवता बद्री नारायण हैं। इन देवता का मंदिर काष्ठ कला का बेजोड नमूना है। मंदिर की छत पर जहां सूरज और चांद विराजमान नजर आते हैं, वहीं इसकी दीवारों पर लकडी पर उकेरी गई हर धर्म के देवी-देवता और उनके गुरुओं की आकृतियां इस मंदिर को निखारती हैं। यदि सडक मार्ग से बटसेरी पहुंचना हो तो यह सांगला से 7 किमी की दूरी पर बसा है।
बादल फटने का असर
सांगला से ही लगभग 14 किमी की दूरी पर बसा है गांव रकछम। इस गांव तक पहुंचने से पहले हम प्रकृति के उन हसीन नजारों से रू-ब-रू होते हैं जिनका दीदार करने के लिए नजरें लालायित रहती हैं। यहां का नैसर्गिक सौंदर्य बरबस ही हमें अपनी ओर खींच लेता है। सडक मार्ग के साथ-साथ और ऊपर पहाडी की ओर हमें ढेर सारे छोटे-बडे पत्थरों की बाड और उनके बीच में उगे हरे-भरे पेड कुछ इस तरह का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते हैं जो हमारी नजरें हटने नहीं देता। खरोगला से मस्तरंग तक ढेर सारे पत्थरों का सैलाब उस वक्त उमडा था जब यहां बादल फटा था और साथ सारी मिट्टी बहाकर ले गया था और बदले में छोड गया था यह पत्थरों का अपार ढेर। लेकिन ये सब आज प्रकृति के नैसर्गिंक सौंदर्य में नया निखार लाते हुए प्रतीत होते हैं। सफर के दौरान हमें बास्पा नदी के किनारे तंबू के कमरेनुमा कैंप भी सजे नजर आते हैं जहां पर्यटक, ट्रेकर ठहरते हैं और ट्रेकिंग का भरपूर आनंद उठाते हैं। इन सब नजारों से घुलते-मिलते हुए हम रकछम पहुंचते हैं। रकछम समुद्र तल से 2900 मी की ऊंचाई पर बास्पा नदी के दार्इं ओर बसा एक छोटा सा सुंदर गांव है। रकछम गांव का नाम दो शब्दों रक और छम से मिलकर बना है। रक का अर्थ पत्थर और छम का अर्थ पुल होता है। इस गांव का अर्थ यहां की भौगोलिक स्थिति को पुरी तरह से ब्यान करने में सक्षम है। मस्तरंग गांव में आइटीबीपी की पहली चौकी स्थित है। सेब का इलाका मस्तरंग तक ही है। उसके बाद सेब नहीं है।
गर्मी में सर्दी का एहसास
हम जितने खतरनाक रास्तों को लांघते जाते हैं हमें उतने ही सुंदर स्थानों के दर्शन होते जाते हैं। ऐसे ही खूबसूरत इलाकों का दीदार करते हुए हम इस घाटी के किन्नौर के सबसे अंतिम और घाटी के सबसे ऊंचे गांव छितकुल पहुंचते हैं। यह गांव सांगला से 26 किमी की दूरी पर स्थित है। इसकी समुद्रतल से ऊंचाई 3450 मीटर है। इस गांव में हाजिर होते ही ऐसा लगता है जैसे हम किसी कल्पना लोक में पहुंच गए हों। ऊपर की ओर हल्की ढलान में बसा यह गांव एक ऐतिहासिक गांव है, जहां लकडी से बने छोटे-छोटे एक-दूसरे से सटे मकान ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे ये ठंड के कारण एक-दूसरे से चिपके हों। वैसे भी यह इलाका बहुत ही ठंडा है जो गर्मी के दिनों में भी जबर्दस्त ठंड का अहसास करा देता है। वर्ष में लगभग 6 महीने यह इलाका बर्फ की चपेट में ही रहता है। जिसके कारण यहां सेब की फसल नहीं होती। यहां के लोगों का रहन-सहन सीधा-सादा व सरल है। इस छोटे से गांव की गलियों में घूमते हुए ऐसा लगता होता है जैसे हम आधुनिकता की चकाचौंध न जाने कितने साल पीछे छोड आए हों। इस गांव में घरों में सालों पुराने बडे-बडे ताले लगे देखकर कोई भी अचंभित हुए बिना नहीं रह सकता। इस गांव से आगे कोई बस्ती नहीं है। गांव की पूच्य देवी को स्थानीय लोग देवी मथी (माता देवी) के नाम से पुकारते हैं। देवी का मुख्य पूजास्थल 500 बर्ष पुराना माना जाता है। साथ ही, यहां एक किला व बुध मंदिर भी है जो लोगों की आस्था का प्रतीक है।
आगे कोई बस्ती नहीं
हालांकि इस गांव के आगे कोई और बस्ती नहीं है, लेकिन गांव के बुजुर्गो का कहना है कि उनके बुजुर्ग कई पीढियों पहले यहां से आगे के गांवों (गढवाल की तरफ) नीलींग, माना आदि से आए थे और छितकुल में बस गए थे। छितकुल से तीन किमी आगे रानीकंडा में आइटीबीपी की चौकी है। इस चौकी से आगे किसी भी नागरिक का जाना वर्जित है क्योंकि छितकुल से लगभग 65 किमी आगे चीन (तिब्बत) की सीमा आरंभ हो जाती है। हालांकि इसके आगे आईटीबीपी की दो और चौकियां भी हैं। छितकुल उत्तराखंड की सीमा से कुछ ही किमी की दूरी पर है।
कब व कैसे -
सांगला आने के लिए सही समय अप्रैल से सितंबर अंत तक का है। -
शिमला से किन्नौर के लिए कई बसें मिल जाती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर शिमला से रिकांगपिओ तक का सफर लगभग 10 घंटे का है। आप रिकांगपिओ या फिर कडछम से सांगला के लिए बस या फिर किराये की गाडी ले सकते हैं।
कहां ठहरें -
आपको पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस और जंगलात महकमे के रेस्ट हाउस के अलावा कई होटल भी आसानी से मिल सकते हैं। यदि आपको एडवेंचर कैंपों का मजा लेना हो तो बटसेरी में बंजारा कैंप, थेमगरंग में बैकुंठ कैंप, सांगला का किन्नौर कैंप आदि आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित आपका इंतजार करते नजर आएंगे।

रिलेशन में अब वो गर्माहट नहीं रही

आपके रिलेशन में अब वो गर्माहट नहीं रही जो पहले हुआ करती थी। तो आइए बताते हैं कुछ ऐसे स्टाइलिश टिप्स जिन्हें अपनाने से आपकी लाइफ में खुशी के ढेरों महकते गुलाब खिल उठेंगे। आपकी लव लाइफ को इतना रोमांटिक और फ्रेश बना लीजिए कि आपका पार्टनर एक नई एनर्जी से दमक उठें।
डांस करें – स्वयं डांस करें या पार्टनर के साथ। चाहे नाचना आता है या नहीं, पर नाचें जरूर।यह आसान जरिया है अपने पार्टनर से करीब से मिलने का। डांस से कॉन्फिडेंस बिल्ड होता है।
म्यूजिक - हर तरह का म्यूजिक रोमांस में फील गुड साबित होता है। म्यूजिक से रोमांस के लिए मूड क्रिएट होता है।
लव नोट्‍स दें – लव नोट्‍स बहुत इंस्पायरिंग होते हैं। आपके पार्टनर ने आपके लिए कुछ लिखा है यही सोचकर आपको एक अलग सी खुशी की फीलिंग्स होगी।
रोमांटिक मूवी देखें – अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक मूवी देखें।

पति बनने के साथ ही आपमें यह बड़प्पन आना चाहिए

शादी में दो मन एक साथ बड़े अरमानों से जुड़ते हैं। लेकिन साल भर होते-होते रिश्तों का सौंधापन ना जाने कहां चला जाता है और तकनीकी रूप से दो लोग साथ होते हुए भी साथ नहीं होते। एक लड़की को नए घर के माहौल के हिसाब से ढलने में समय लगता है लेकिन लड़के की भारी भरकम अपेक्षाओं के बोझ तले वह मुरझा जाती है।
बाहरी तौर पर भले ही वह मुस्कुराती नजर आए पर भीतर ही भीतर बहुत कुछ दरकता है। यही स्थिति कमोबेश लड़कों के साथ भी होती है। लेकिन यहां हम लड़कों की तरफ से होनी वाली मामूली सी नादानियों का जिक्र करेंगे ताकि समय पर कुछ रिश्ते संभल जाए।
अक्सर शादी के बाद लड़के अपने परिवार को पत्नी के सामने अतिरिक्त तवज्जो देने लगते हैं। वास्तव में लड़कों की स्थिति बड़ी अजीब हो जाती है। जिस परिवार के साथ वह इतने सालों तक रहा अचानक उसे उनका समय चुरा कर अपनी पत्नी को देना होता है। इसलिए वह अपने परिवार की भावनाओं को समझने की जल्दबाजी में पत्नी की भावना को नहीं समझता।
जहां परिवार वाले समझदार हैं और पति-पत्नी के एकां‍त का महत्व समझते हैं वहां यह समस्या इतनी खड़ी नहीं होती क्योंकि दो दिलों को अपने लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। लेकिन जहां परिवार वाले भी नई दुल्हन के आने से असुरक्षा की भावना से ग्रस्त हैं वहां वे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अपना हस्तक्षेप बढ़ाने से बाज नहीं आते। और इस करेले पर नीम पति की तरफ से चढ़ाया जाता है।
लड़कों में कुछ बातों को समझने की व्यावहारिकता थोड़ी कम होती है नतीजतन वे अपनी बीवी को ही दोषी मानने लग जाते हैं कि उसे परिवार रास नहीं आ रहा। लड़कों को चाहिए कि वह अपनी नई नवेली पत्नी को धीरे-धीरे रिश्तेदारों के बारे में बताए और उसे कभी भी यह महसूस न होने दें कि परिवार हमेशा ही सही है और वह गलत।
पति बनने के साथ ही आपमें यह बड़प्पन आना चाहिए कि अब आप पर दो लोगों का दायित्व है न कि आप स्वयं भी पत्नी से परिवार के अलावा आपके साथ भी जल्दी से जल्दी एडजस्ट होने की उम्मीद लेकर बैठ जाए। यहां रिश्तों की सबसे पहली दरार पड़ती है इसे पाटना सिर्फ और सिर्फ पति के हाथ में होता है।
याद रखिए पत्नी को आपका परिवार बुरा नहीं लग रहा है बल्कि आपका 24 घंटे मेरा परिवार-मेरा परिवार का जाप बुरा लग रहा है। इस जाप पर कंट्रोल भी आपको ही करना होगा। पत्नी को अभी प्यार और विश्वास की सख्त जरूरत है। यही वक्त है उसका दिल जीतने का। बाद में तो जीवन भर उसे आपके परिवार के साथ ही रहना मगर पहले साल में उसे अपना बनाना, अपने अनुकूल बनाना आपकी जिम्मेदारी है।

प्यार भरे रिश्ते की नई-नई शुरूआत हुई है हनीमून सुइट बुक करें।

अगर आपकी जिंदगी में प्यार भरे रिश्ते की नई-नई शुरूआत हुई है या होने वाली है सा फिर एक अरसा हो गया कि आपने अपने साथी के साथ प्यार भरे पल बिताएं हों, तो देर किस बात की।
 हम आपको बताते हैं कि इस बार छुट्टियों का मजा किस रोमांटिक अंदाज में लें। इस तरह से आप अपने रिश्ते को न सिर्फ ज्यादा बेहतर बना सकते हैं बल्कि फिर से उसमें नई ताजगी और उमंग भर सकते हैं। तो पेश है कुछ खास रोमांटिक अंदाज, जिससे आपका वेकेशन और भी हसीन हो जाएगा।
आपकी शादी को कितना वक्त हो गया है इसकी परवाह किए बिना इस बार हनीमून सुइट बुक करें। दरअसल हनीमून सुइट का ऐम्बियांस रोमांटिक होने के लिए परफेक्ट होता है यानी रोमांस की आपकी लाइफ में हो जाएगी री-एंट्री। पुराने लम्हों को याद करें और और नई खूबसूरत यादें बनाएं और मनाएं एक शानदार हनीमून।
रोज़मर्रा की जिन्दगी में कपल्स शायद ही कभी सूरज को डूबता हुआ एक साथ देख पाते हैं। ऐसे में ये रोमांटिक हॉलीडे रोज़ की भागदौड़ को पीछे छोड़ रोमांटिक सनसेट का लुत्फ उठाने के लिए बढ़िया मौका है। कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है, हाथों में हाथ हो, हसरत भरी निगाहें हों और डूबते हुए सूरज के साथ रंग-बिरंगे आसमान का मजा लें।
कोई भी हॉलीडे रोमांटिक डिनर के बिना कैसे पूरा हो सकता है? डिनर पर एक परफेक्ट आउटफिट में जाएं, अच्छे से सजे-संवरें और तैयार हों, बस फिर एक रोमांटिक डिनर डेट का लुत्फ उठाएं। साथ में डांस करें। आप दोनों के लिए यह हसीन शाम यादगार बन जाएगी।

पत्नी आपसे सुनना या पाना चाहती है।

पत्नी नई नवेली या बरसों बरस की साथी। अक्सर किसी पहेली से कम नहीं होती। समझ में नहीं आता उसे क्या अच्छा लगता है, कब अच्छा लगता है, कब बुरा लगता है और कब वह कुछ खास आपसे सुनना या पाना चाहती है। आइए जानते हैं इस प्रश्नावली के माध्यम से कि आखिर आप अपनी पत्नी को कितना जानते हैं?
1-आपकी पत्नी आपसे क्या चाहती है?
क. ढेर सारे उपहार
ख. दांपत्य जीवन के प्रति प्रतिबद्धता 
ग. आप उसे पहले नंबर की प्राथमिकता दें 

2- आपकी पत्नी चाहती है कि आप- 
क. उसके ड्यूटी आने से पहले घर के कामकाज शुरू कर दें 
ख. उसका इंतजार करें 
ग. यह उसकी ड्यूटी है यह मानें 

3- आपकी पत्नी चाहती है कि- 
क. आप उसके साथ भावुक क्षणों में हों 
ख. आप उसे ऐसे क्षणों में अकेला छोड़ दें 
ग. आप अपने में मस्त रहें 
4- आपकी पत्नी चाहती है कि आप उसे- 
क. उपहार में रसोई की चीजें दें 
ख. कपड़े और गहने दें 
ग. यादगार चीजें दें जिन पर औरतों की पारंपरिक छवि न जुड़ी हो 
5- आपकी पत्नी चाहती है कि- 
क. आप उसे जींस में मोटी न कहें 
ख. आप उसे मनपसंद कपड़े पहनने दें 
ग. आप अपने मन के कपड़े पहनाएं 
6- आपकी पत्नी चाहती है कि- 
क. आप उसे जानें 
ख. बच्चों से ज्यादा उसका खयाल रखें 
ग. आप उससे अंतरंग हों 
7- आपकी पत्नी चाहती है कि- 
क. आप बच्चों के प्रति जिम्मेदार बनें 
ख. बच्चों से ज्यादा उसका खयाल रखें 
ग. पूरे परिवार के लिए अपना खयाल रखें

पत्नी ने रमन के पास आकर कहा

शादी का फंक्शन चल रहा था। रमन भी अपनी पत्नी के साथ शादी में पहुंचा।
थोड़ी देर पत्नी ने देखा कि रमन किसी महिला से घुल-मिलकर हंसते हुए बातें कर रहा है।
पत्नी ने रमन के पास आकर कहा- यह आयोडेक्स मैं घर पहुंच कर तुम्हारे सिर के घाव पर लगा दूंगी।
रमन- लेकिन मेरे सिर में घाव कहां है?
पत्नी- अभी हम घर भी कहां पहुंचे हैं?
एक कंजूस बाप ने बेटे को नया चश्मा दिला दिया।
अगले दिन बेटा कुर्सी पर बैठा कुछ सोच रहा था।
कंजूस पिता ने आवाज लगाई- क्यों बेटे… पढ़ रहे हो?
 बेटा- नहीं पिताजी।
पिता- तो कुछ लिख रहे हो?
बेटा- जी नहीं, पिताजी।
पिता (गुस्से से)- तो फिर चश्मा उतार क्यों नहीं देते?
तुम्हें फिजूलखर्ची की आदत पड़ गई है।

बेटा सोने की बजाय उसका इंतज़ार कर रहा है

एक व्यक्ति आफिस में देर रात तक काम करने के बाद थका-हारा घर पहुंचा . दरवाजा खोलते ही उसने देखा कि उसका छोटा सा बेटा सोने की बजाय उसका इंतज़ार कर रहा है . अन्दर घुसते ही बेटे ने पूछा —“ पापा , क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ?” “ हाँ -हाँ पूछो , क्या पूछना है ?” पिता ने कहा . बेटा – “ पापा , आप एक घंटे में कितना कमा लेते हैं ?” “ इससे तुम्हारा क्या लेना देना …तुम ऐसे बेकार के सवाल क्यों कर रहे हो ?” पिता ने झुंझलाते हुए उत्तर दिया . बेटा – “ मैं बस यूँ ही जाननाचाहता हूँ . प्लीज बताइए कि आप एक घंटे में कितना कमाते हैं ?” पिता ने गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए कहा , नहीं बताऊंगा , तुम जाकर सो जाओ “यह सुन बेटा दुखी हो गया …और वह अपने कमरे में चला गया . व्यक्ति अभी भी गुस्से में था और सोच रहा था कि आखिर उसके बेटे ने ऐसा क्यों पूछा ……पर एक -आध घंटा बीतने के बाद वह थोडा शांत हुआ , फिर वह उठ कर बेटे के कमरे में गया और बोला , “ क्या तुम सो रहे हो ?”, “नहीं ” जवाब आया . “ मैं सोच रहा था कि शायद मैंने बेकार में ही तुम्हे डांट दिया।
दरअसल दिन भर के काम से मैं बहुत थक गया था .” व्यक्ति ने कहा. सारी बेटा “…….मै एक घंटे में १०० रूपया कमा लेता हूँ……. थैंक यूं पापा ” बेटे ने ख़ुशी से बोला और तेजी से उठकर अपनी आलमारी की तरफ गया , वहां से उसने अपने गोल्लक तोड़े और ढेर सारे सिक्के निकाले और धीरे -धीरे उन्हें गिनने लगा . “ पापा मेरे पास 100 रूपये हैं . क्या मैं आपसे आपका एक घंटा खरीद सकता हूँ ? प्लीज आप ये पैसे ले लोजिये और कल घर जल्दी आ जाइये , मैं आपके साथ बैठकर खाना खाना चाहता हूँ .” दोस्तों , इस तेज रफ़्तार जीवन में हम कई बार खुद को इतना व्यस्त कर लेते हैं कि उन लोगो के लिए ही समय नहीं निकाल पाते जो हमारे जीवन में सबसे ज्यादा अहमयित रखते हैं. इसलिए हमें ध्यान रखना होगा कि इस आपा-धापी भरी जिंदगी में भी हम अपने माँ-बाप, जीवन साथी, बच्चों और अभिन्न मित्रों के लिए समय निकालें, वरना एक दिन हमें अहसास होगा कि हमने छोटी-मोटी चीजें पाने के लिए कुछ बहुत बड़ा खो दिया…

Sunday, 14 June 2015

बिल्ली बैठी एक पुराने गंदे कटोरे में दूध पी रही थी। (Hindi Joke)

जुम्मन मियाँ की बाजार की एक गली में छोटी सी मगर बहुत पुरानी दरजी की दूकान थी। उनकी इकलौती सिलाई मशीन के बगल में एक बिल्ली बैठी एक पुराने गंदे कटोरे में दूध पी रही थी।
एक बहुत बड़ा कलापारखी जुम्मन मियाँ की दूकान के सामने से गुजरा। बिल्ली के कटोरे को देख वह आश्चर्यचकित रह गया। वह कलापारखी होने के कारण जान गया कि कटोरा एक एंटीक आइटम है और कला के बाजार में बढ़िया कीमत में बिकेगा। लेकिन वह ये नहीं चाहता था की बड़े मियाँ को इस बात का पता लगे कि उनके पास मौजूद वह गंदा सा पुराना कटोरा इतना कीमती है। उसने दिमाग लगाया और जुम्मन मियाँ से बोला---- " बड़े मियाँ, आदाब, आप की बिल्ली बहुत प्यारी है, मुझे पसंद आ गयी है। क्या आप बिल्ली मुझे देंगे ? चाहे तो कीमत ले लीजिये।"
जुम्मन मियाँ ने पहले तो इनकार किया मगर जब कलापारखी कीमत बढाते बढाते 10000 रुपयों तक पहुँच गया तो जुम्मन मियाँ बिल्ली बेचने को राजी हो गए और दाम चुकाकर कलापारखी बिल्ली लेकर जाने लगा।
अचानक वह रुका और पलटकर जुम्मन मियाँ से बोला---" बड़े मियाँ बिल्ली तो आपने बेच दी। अब इस पुराने कटोरे का आप क्या करोगे। इसे भी मुझे ही दे दीजिये बिल्ली को दूध पिलाने के काम आयेगा, चाहे तो इसके भी 100 - 50 रूपये ले लीजिये। "
जुम्मन मियाँ ने जवाब दिया---- " नहीं साहब जी, कटोरा तो मैं किसी कीमत पर नहीं बेचूंगा क्योंकि इसी कटोरे की वजह से आज तक मैं 50 बिल्लियाँ बेच चुका हूँ "

हमने भी पेल दिया ससुरी को।

जज: तुमने इसका रेप क्यों किया?
बिहारी: हमने रेप नहीं किया,
मैडम ने खुद बोला करने को।
जज: क्या बोला तुमको?
बिहारी: मैडम कोई टॉफ़ी खा रही थी,
मैंने टॉफ़ी का नाम पूछा तो बोली,
"आ पेल ले बे, (Alpenlibe)
तो हमने भी पेल दिया ससुरी को।"

Funny Line

जिस उम्र में हमारे दांत टुटा करते थे,

 उस उम्र में आज बच्चो के दिल  टूट जाते हे.... ।

Agar Koi Patthar Mare

कोई अगर पत्थर मारे तो उसका जवाब फूल से दो
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 लेकिन फूल उसकी कब्र पर जाके देना !

Girl- भैया, आप अपने सोने का देखे,

Boy - गले में लाल टाई,
घर में एक चारपाई,
तकिया एक और हम दो,
 एक ही है रज़ाई
Girl- भैया, आप अपने सोने का देखे, मेरे लायक सब मौजूद है यहाँ

लोग गाय को हाथ लगाकर नमस्कार कर रहे थे .

एक मन्दिर के सामने 1 गाय ,1 गधा और 1 गधी घास खा रहे थे ...
 मन्दिर मे आने वाले
लोग गाय को हाथ लगाकर नमस्कार कर रहे थे ...
यह देखकर गधी गधे से बोली:
"सब गाय को ही हाथ लगाकर चले जाते है
पर मुझे कोई हाथ नहीं लगाता ... ???"
गधा: मैडम आपके साथ आपका हीरो है किसकी मजाल जो मेरे होते आपको हाथ लगाए..

सब नकाब बदलते हैं...

सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से...
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !
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रख् अपने हि पास् अपने सितारे 
ए आसमन्.

हम् खुद् किसिकि आन्ख् के तारे है 
ईन् दिनो
ख़ामोश बैठे हे तो लोग कहते हे उदासी अच्छी नही लगती,,

और ज़रा सा हँस लुँ,तो लोग मुस्कुराने की वजह पुछ लेते हे.!!!!!
"चुपके से धड़कन में उतर जायेंगे,
राहें उल्फत में हद से गुजर जायेंगे,
आप जो हमें इतना चाहेंगे.....
हम तो आपकी साँसों में पिघल जायेंगे." 
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तू छोड़ दे कोशिशें.....
इन्सानों को पहचानने की...!
यहाँ जरुरतों के हिसाब से .... 
सब नकाब बदलते हैं...!
अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर.
हर शख़्स कहता है-
यै दुनिया मैरे कम कि नही!!!
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Saturday, 13 June 2015

90% भारतीय मन्दबुद्धि/मूर्ख होते हैं।

अपने देश में लोग बड़े ही निराले हैं, वेबसाईट बनवानी है तो उसको भी समझते हैं कि साग़-सब्ज़ी खरीद रहे हों….. क्या भाव दिया भैय्या?! ये ज़्यादातर ऐसे लोग होते हैं जिनको इन मामलों में चार आने की समझ नहीं होती। एक अलग तरीके का उदाहरण देखें तो मान लीजिए मारूति 800 या टाटा नैनो जैसी बजट गाड़ी चलाने वाला रॉल्स रॉयस या बेन्टली के शोरूम में चला जाता है तो वो वहाँ क्या पूछेगा? कितना माईलेज देती है भैय्या? :D इसी तर्ज़ पर एक विज्ञापन भी बना था, शायद मारूति का ही।
हुआ यूँ कि एक समूह में किसी ने वेबसाईट डिज़ाईनर का रेफ़रेन्स माँगा, एक मित्र ने किसी व्यक्ति का नाम सुझा दिया। खरीददार ने सप्लायर से पूछा कि भई कोई सैंपल दिखाओ तो उसने दिखा दिया। अब खरीददार ने पूछा क्या भाव तो सप्लायर ने बोला कि आपको क्या चाहिए यह समझे बिना भाव नहीं बता सकते। खरीददार अड़ गया, बोला कि वो सब छोड़ो आप ऐसे ही आईडिया दे दो बस। सप्लायर को लगा कि ये बंदा समय बर्बाद करेगा (ठीक भी है ऐसे लोगों के साथ काम करना बहुत आफ़त वाला काम होता है ऐसा मैं अपने निजि अनुभव से कह सकता हूँ) तो उसने हाथ जोड़ दिए कि माफ़ करो जनाब हम ऐसे काम नहीं करते। अब तो खरीददार को लगा कि उसकी तो बेइज़्ज़ती हो गई तो उसने सप्लायर को सरेआम अहंकारी, नामाकूल, कमीना आदि शानदार अलंकारों से नवाज़ दिया।
आगे क्या हुआ? एक मोहतरमा ने अपनी सेवाएँ ऑफ़र करी, खरीददार ने फिर वही पूछा। मोहतरमा ने कहा कि आप संपर्क करने की जानकारी उपलब्ध कराएँ तो अपनी कंपनी का प्रोफाईल और कुछ सैंपल भेज दिए जाएँ। खरीददार इसमें खुश। हालांकि मोहतरमा ने भी यही दोहराया कि बिना खरीददार की आवश्यकता समझे भाव नहीं बताया जा सकता लेकिन इसमें खरीददार को कोई आपत्ति नहीं अब। पहले वाले सप्लायर ने जब यह कहा था तो वह अहंकारी और नामाकूल था! 
 सबक: जैसा कि श्रीमान काटजू ने कोई दो वर्ष पहले कहा था, 90% भारतीय मन्दबुद्धि/मूर्ख होते हैं। 

ढकोसला बताने वाले ढकोसलेबाज़ जन्तु होते हैं

जैसे धर्म को ढकोसला बताने वाले ढकोसलेबाज़ जन्तु होते हैं उसी प्रकार ढोंगी धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार होते हैं।
 अभी कुछ समय पहले एक मानव अधिकार के ठेकेदार से बात हो रही थी। वे जनाब जम कर इज़राईल (Israel) को लानत-फ़लानत भेज रहे थे, मैं तसल्ली से सुन रहा था। इस बात को स्वीकारने से मुझे कोई परहेज़ नहीं है कि लड़ाई-झगड़ा ठीक नहीं है, समय और साधन की बर्बादी है और विकास के मार्ग में रोड़ा भी है। एक नज़रिए से काफ़ी विकास इन्हीं कारणों से होता है, लेकिन फिलहाल उस दार्शनिक सूत्र को नज़रअंदाज़ करते हैं। बात चलते-२ जैसे ही इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ईराक़ एण्ड सीरिया (ISIS) पर आई तो मानव अधिकारवादी साहब असहज हो गए।
अब ऐसे ही चर्चा चल रही थी, इन्होंने इज़राईल पर अपने विचार व्यक्त किए थे। मैंने आईसिस और उनके द्वारा स्त्रियों की खरीद-फ़रोख़्त का जो मामला चल रहा है उस पर चर्चा को मोड़ा। आईसिस नामक आतंकवादी संगठन सिर्फ़ ईराक़ (Iraq) और सीरिया (Syria) के गाँवों, शहरों और तेल पर ही कब्ज़ा नहीं कर रहा वरन्‌ वहाँ के नागरिकों पर भी कब्ज़ा कर रहा है। पंद्रह-सोलह वर्ष की बालिकाएँ भी यौन शोषण के लिए पशुओं की तरह बेची जा रही हैं। तो जब बात इस विषय पर आती है तो एकाएक ही ऐसे मूढ़ धर्मनिर्पेक्ष लोगों को साँप सूँघ जाता है। क्यों?
इसका सीधा सादा एक ही कारण मुझे समझ आता है। ऐसे धर्मनिर्पेक्ष लोग महा-ढोंगी होते है और इनकी धर्मनिर्पेक्षता एक आडंबर से अधिक कुछ नहीं होती। यदि मामला भारत का हो तो हिन्दू दोषी हैं – गुजरात के दंगों की बात बारंबार उठा लेते हैं लेकिन गोधरा की ट्रेन में ज़िन्दा जलाए गए लोगों की बात पूरी सहजता से भुला दी जाती है। इज़राईल को गाली दे लेंगे लेकिन हमास (Hamas) की बात नहीं करते जो फिलीस्तीनी नागरिकों को अपनी ढाल बना के आगे कर देते हैं कि इज़राईल की बमबारी से आम नागरिक मरें और वे उस बात को प्रोपागेन्डा (propaganda) के रूप में भुना सकें दुनिया भर को इज़राईल की क्रूरता के सबूत के तौर पर उधड़ी हुई लाशें दिखा कर। मैं यह नहीं कह रहा कि गुजरात के दंगे सही थे या इज़राईल पूर्णतया सही है लेकिन हर कहानी के दो पहलू होते हैं, एक ही पहलू को जान और दूसरे को नज़रअंदाज़ कर कोई भी मत बनाना अव्वल दर्जे की मूर्खता ही है। तो इन दो मामलों में तो हिन्दू और यहूदियों को कमीना बतलाया जाता है लेकिन आईसिस के मामले में किसे कमीना बतलाएँ? वहाँ तो मुसलमान ही मुसलमानों को मार-काट रहे हैं, मुसलमान ही दूसरे मुसलमानों की अबोध बालिकाओं का यौन शोषण कर रहे हैं!!
इसी कारण से ऐसे तथाकथित धर्मनिर्पेक्ष लोग आईसिस का मुद्दा उठते ही बग़लें झाँकने लगते हैं। कल पढ़ा किसी तो अख़बार के लेख में – ईराक़ में आईसिस और अल्लाह की खिदमत कर वापस महाराष्ट्र लौटे बहादुर जिहादी को विक्टिम (victim) बतलाया गया था। इस फ़िदाईन-ए-हिन्द ने पुलिस पूछताछ के दौरान बहुत गर्व से कहा कि वह “अल्लाह” के काम से ईराक़ गया था….. वाह, सुभान-अल्लाह। आईसिस एक आतंकवादी संगठन है और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसको आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इसलिए कायदे अनुसार इस व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर इस पर मुकदमा चलना चाहिए और सज़ा होनी चाहिए। लेकिन कोई बड़ी बात नहीं है कि कल को चार धर्मनिर्पेक्षता के झण्डाबरदार खड़े हो जाएँ इसको माफ़ी दिलाने के लिए।
जब तक देश का कानून और संविधान स्वयं लोगों को बिना धर्म का चश्मा लगाए देखना शुरु नहीं करेगा और सबके साथ (बिना व्यक्ति के धर्म का विचार किए) समान आचरण करना आरंभ नहीं करेगा तब तक ऐसी ढोंगी धर्मनिर्पेक्षता का यहाँ बोलबाला रहेगा। यदि देश में किसी एक धर्म के लोग अधिक हैं तो क्या वे बाकी धर्मों को मानने वालों से माफ़ी माँगे, या अपनी संख्या कम करने के लिए आत्महत्याएँ शुरु कर दें? यदि किसी धर्म को मानने वाले नागरिक संख्या में कम हैं तो उनकी संख्या बढ़ाना या उनको अधिक सहूलियतें मुहैया कराना धर्मनिर्पेक्ष देश के शासन की ज़िम्मेदारी नहीं है – नियम, कानून और संविधान सबके लिए एक समान होने चाहिए, कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए – यही धर्मनिर्पेक्षता होती है।

Friday, 12 June 2015

ले जाँएगे दिल मेरा कोई

कुछ मतलब के लिए
ढूँढते है मुझ को,
बिन मतलब जो आए
तो क्या बात है ,
कत्तल कर के तो सब
ले जाँएगे दिल मेरा कोई
बातो से ले जाए तो क्या बात है

ख्‍बाबों ने सपनों में आना छोड दिया

“हंसी ने लबों पर थिरकना छोड दिया,
ख्‍बाबों ने सपनों में आना छोड दिया,
नहीं आती अब तो हिचकीया भी,
शायद आपने भी याद करना छोड’ दिया ”

एक ही गीत में पूरी उम्र देखिये

एक ही गीत में पूरी उम्र देखिये
नयनो में सपना (उम्र 5 से 15)
सपनों में सजना (उम्र 15 से 25)
सजना पे दिल आ गया (उम्र 25 से 35)
 क्यूं सजना पे दिल आ गया (उम्र 35 से 40)
 बाकी पूरी उम्र : ता थैया ता थैया..ओ..

लड़के ने अपनी गर्लफ्रेंड को फोन किया

मेरठ के एक लड़के ने अपनी गर्लफ्रेंड को फोन किया तो उसके पापा ने उठा लिया, लड़का मन मे बोला हे भगवान ये कहाँ से आ गया,
पिता : हैलो, कौन बोल रहा है?
लड़का : मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूँ, कौन बनेगा करोड़पति" से और आपकी बेटी की फ्रेंड हॉट सीट पर बेठी है और आपकी बेटी की मदद चाहती है,
उसको फोन दीजिये Sir,
पिता : ओह, रोमांचित हो कर बेटी को फोन दे दिया,
लड़का : सवाल यह "आज शाम को तुम कहाँ मिलोगी?"
(Option A) PVS mall
(Option B): khen nagar
(Option C): indra chowk
(Option D) : Shiv Chowk
 लडकी : "Option A
लड़का : धन्यवाद, और अब आप का समय समाप्त होता है. पिता अभी तक खुशी के मारे फुले नहीं समा रहे थे.......

कमरतोड़ मेहनत करने के बाद घर में घुसते हीं निठल्ले बैठे

एक माँ की “दिल छु लेनेवाली कहानी” 
दिन भर कमरतोड़ मेहनत करने के बाद घर में घुसते हीं निठल्ले बैठे उनके पति ने कहा —अरे सुनो आज दिहाड़ी(दैनिक मजदूरी)तो मिल हीं गया होगी, 
चल जल्दी से बीस रुपए का नोट निकाल, इंतज़ार में मैं कब से बैठा हूँ. मालूम है न कई दिन हो गए कंठ सूख रहा है.
 अध्धा या पौआ कुछ तो ले आऊं, बेचैन हो रहा हूँ. पत्नी के कान में जैसे हीं ये आवाज आई, वो बुदबुदाने लगी और बोली — निठल्ला खुद तो दिन भरकुछ करता नहीं है और बड़ा आया मुझसे पैसा माँगने.
 और फिर बोल पड़ी, 
नहीं हैं मेरे पास रुपए तुम्हे देने के लिए. इतना सुनते हीं पतिदेव की पौरुष शक्ति जाग पड़ी और फिर से जोर से चिल्लाकर बोला—अरे सुनाई नहीं दिया तुम्हे —- जल्दी निकाल वरना !
पत्नी फिर से बोल पड़ी —बोली न नहीं है मेरे पास . इसके बाद वो गुस्सा से आग बबुला होकर वो सामने आकर बोला देख चुपचाप रुपए निकाल, वरना घुस्सा मारकर अधमरा कर डालूँगा, दिमाग मत ख़राब कर मेरा, अब जल्दी निकाल. चल बीस नहीं तो दस हीं निकाल..
पत्नी बोली : नहीं हैं मेरे पास दस रुपए. इतना सुनते हीं वह घुस्से और लात अपनी पत्नी पर बरसाने लगा. और रात भर वो अपनी मर्दानगी अपने दिन भरकी मेहनत करके आई पत्नी पर दिखाता रहा. सुबह हुई उनके घर में एक छोटा सा बच्चा जो डरा सहमा हुआ माँ की गोद में आया और बोला: माँ-माँ,आज फिर मेरी स्कुल में पिटाई होगी…..
 क्यूंकी किताब के लिए रुपए नहीं होगा देने के लिए. कल हीं मैडम ने रुपए लेकर आने के लिए बोला :नहीं तो पिटाई की बात कही है. 
माँ ने बेटा को बड़े प्यार से अश्रु आँख में लिए —— और खुशहोकर बोली— — बेटा तुम्हारी स्कुल में मारन खानी पड़े इसलिए तो मैं सारी रात तेरे बाप से मार खाती रहीं.
 फिर बीस रुपए निकालकर—– अपने बेटे को दिए . बच्चे नेअपनी माँ की ओर देखा और गले लगा लिया।
 सीख- मां अपने बच्चो के लिए हर दुःख सह लेती है, कुछ भी कर गुजरती है, माँ का सम्मान करना चाहिए !

एक भैंस घबराई हुई जंगल मे भागी जा रही थी

एक भैंस घबराई हुई जंगल मे भागी जा रही थी
एक चूहे ने पूछा : क्या हुआ बहन कहाँ भागे जा रही हो?
भैंस : जंगल मे हाथी को पुलिस पकडने आई हें
चूहा : पर तुम क्यों भाग रहीं हो तुम तो भेंस हो?
भेंस : लगता हे तुम नये हो,
ये भारत हें भाई !
पकडे गये तो 20 साल तो अदालत मे ये सिद्ध करने मे ही लग जायेंगे कि
 " मैं हाथी नही भेंस हूँ "
"OMG" यह सुन भेंस के साथ चूहा भी भागने लगा

बुत मिलते हैं फिर कोई तुझ सा नहीं मिलता,

नज़र जिसको तरसती हैं वो चेहरा नहीं मिलता,
बुत मिलते हैं फिर कोई तुझ सा नहीं मिलता,
किसे देखूं, किसे चाहूँ, किसे अपना समझूं ;
जहाँ की इस भीड़ मे कोई अपना नहीं मिलता।

नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया!

गम ने हसने न दिया,
ज़माने ने रोने न दिया!
इस उलझन ने चैन से जीने न दिया!
थक के जब सितारों से पनाह ली!
नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया!

Thursday, 11 June 2015

जवानी में ही बुढ़ापे के असर की गारंटी है

मुझे गुटखा कहते हैं!
हर नुक्कड़ चौराहे पे, पान की दूकान पर,
भिन्न भिन्न आकार में, भिन्न भिन्न प्रकार में,
आपकी सेवा में उपलब्ध हूँ श्रीमान, मुझे गुटखा कहते हैं!
आप भी आएं, दूसरों को भी लाएं,
खुद भी खाएं, दूसरों को भी खिलाएं,
क्योंकि सहजता व प्रचुरता में उबलब्ध हूँ श्रीमान, मुझे गुटखा कहते हैं!
गले और गाल के कैंसर की गारंटी है
जवानी में ही बुढ़ापे के असर की गारंटी है
धीरे धीरे गुटक लेता हूँ इंसानों की जान, मुझे गुटखा कहते हैं!
खांसी कफ़ के साथ साथ, दांत भी खराब होंगे
शारीरिक कमजोरी के संग, गुर्दे और आंत भी खराब होंगे
मेरे भेजे मुर्दों से तो क्षुब्ध है श्मशान, मुझे गुटखा कहते हैं!
छोटी मोटी विपदा नहीं, साक्षात् काल हूँ मैं,
यम यहाँ, दम वहां, उससे भी विकराल हूँ मैं,
साक्षात् मौत के सामान का प्रारब्ध हूँ श्रीमान, मुझे गुटखा कहते हैं!
जीवन पर्यंत आपको कंगाल बनाए रखूँगा,
इस बेशकीमती ज़हर का ग़ुलाम बनाए रखूँगा
आप फिर भी मुझे गुटक रहे हैं, स्तब्ध हूँ 

जहर बाटने का सरकार द्वारा हक प्राप्त है

मैगी बैन और गुटखा.
सिगरेट. शराब चली जा रही है............. .
क्योंकि इन्हें जहर बाटने
का सरकार द्वारा हक प्राप्त है
 मैगी को नही.......
हमने भी मैगी खाना छोड़ दिया
पर बाकी सब चली जा रही है......

खिलखीलाती रहेगी ये फुलो की डाली।

बगीया मे आइ एक नन्ही परी
खिलखीलाती रहेगी ये फुलो की डाली।
 कभी रो कर कभी हँस कर
हँसाती रहेगी ये लाली।

Wednesday, 10 June 2015

आंखों में आंसू लाना कम से कम

ग़ज़ल लेखन की कला एवं इसकी बारीकियों की गहराई को जान लेना ही ग़ज़ल लेखन की शर्तें नहीं है। छन्दानुशासन के भीतर जो इसका सौन्दर्यवोध होता है, वह बिम्व,प्रतीक और संकेतों के अर्थपूर्ण समन्वय की कला है। हिन्दी में ग़ज़ल लेखन की जो परंपरा विकसित हुई है,वह कई मायने में हिन्दी कविता के लिए महत्वपूर्ण तो है ही साथ ही इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि ग़ज़ल के नाम पर कुछ अर्थहीन और प्रभावहीन ग़ज़लें लिखीं जा रहीं हैं। हालांकि यह परेशान करनेवाली बातें नहीं है क्योंकि जब कोई विधा विकास और साहित्य में स्थापित होने के लिए अग्रसर होती है तो उस विधा को कुछ नकारात्मक लेखन का भी सामना करना पड़ता है। इस नकारात्मक लेखन का प्रभाव हिन्दी ग़ज़ल पर भी पड़ा है। शायद यही कारण है कि छन्द को नहीं जाननेवाले आलोचक कथ्य की ही ख्रूंट पकड़कर हिन्दी ग़ज़ल के पीछे हथियार लेकर दौड़ रहे हैं। लेकिन यह चिंता का विषय नहीं है क्योंकि ग़ज़ल लेखन के साकारात्क पक्ष काफी मजबूत हैं।
हिन्दी ग़ज़लकारों में कुछ नाम अत्यधिक चर्चा में है तो वह हिन्दी ग़ज़ल की स्थापना की कड़ी में देखा जा सकता है। इसी कड़ी के रुप में माधव कौशिक का नाम भी हिन्दी के एक महत्वपूर्ण ग़ज़लकार के रूप में लिया जाता है। इसका प्रमुख कारण है कि माधव कोैशिक ने हिन्दी ग़ज़ल पर काफी काम किया है। कई ग़ज़ल संग्रह उनके प्रकाशित हो चुके हैं। इन्ही ग़ज़ल संग्रहों में से एक ग़ज़ल संग्रह ' सारे सपने बागी हैं' हाल ही में वाणी प्रकाशन से छपकर पाठकों के समक्ष आया है। संग्रह में कुल 96 ग़ज़लें हैं। यह विभिन्न भावों संकेतो और विम्बों से लैश है। साथ ही इन ग़ज़लों में कहन का सौन्दर्य और पाठ में सहज लयात्मकता है। उदाहरण के तौर पर
अपने दिल का हाल सुनाना कम से कम
आंखों में आंसू लाना कम से कम

मिलने वाली चीजें खुद मिल जाती हैं
अपने दामन को फैलाना कम से कम
उपरोक्त वर्णित शेरों में माधव कौशिक की प्रगति​शील चिंता तो है ही साथ ही दु:ख, तकलीफ, मजबूरियों का तल्ख एहसास भी है और अपने इन एहसास को नई सोंच के साथ तकलीफ के विरूद्ध समाज को डटे रहने की प्रेरणा देते हैं। हिन्दी ग़ज़ल के प्रसिद्ध आलोचक अनिरूद्ध सिन्हा द्वारा इनकी ग़ज़लों के बारे में की गयी टिपण्णी—'' माधव कौशिक की ग़ज़लों में सादगी है। समाज की बोलती बतियाती तस्वीरें हैं जिसमें एक मध्यवर्गीय जीवन का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत होता है।'' सचमूच में '' सपने सारे बागी हैं'' की अधिकांश ग़ज़लें मध्यवर्गीय जीवन की व्याख्या करते हुए मुश्किलों से लड़ने की दलीलें भी पेश करती है। आज का जीवन सचमूच में भीतर से लहूलुहान है इसी लहूलुहान जीवन और रिश्तों के बीच माधव कौशिक कहते हैं कि—
बेयकीनी ने हमें अंदर से अंधा कर दिया
गर यकीं हो तो पहाड़ों का जिगर​ हिलता भी है।
बावजूद इसके माधव कौशिक ग़ज़लों का कैनवॉस काफी बड़ा है जिसमें धूप, नदी, वारिश, घटा, रंग—बिरंगे फूल आदि जीवन उत्सव के कई चित्र मिलते हैं कारण है माधव कौशिक अवसाद की चादर ओढ़कर पाठकों के समक्ष नहीं आते हैं बल्कि अपनी खुली आंखों में कुछ बेहतर चित्र लेकर भी प्रस्तुत होते हैं। मसलन—
जीवन का क्या कोई मानक होता है
खूशबू का आरंभ अचानक होता है

बेहतर है कोई चिंगारी निकले क्यों
हिंसा का परिणाम भयानक होता है
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि ' सपने सारे बागी हैं' कि ग़जलों में एक साथ रोमांच, रहस्य, जीवन भविष्य की कल्पना और विद्रोह की सुगबुगाहट है। इन ग़ज़लों से गुजरने के बाद पाठकों को आत्मबल मिलेगा।

जिन्हें देखकर तमाम छात्रों की पैंट गीली हो जाती थी।

पिछले साल करवा चौथ पर मेरी पत्नी ने बड़े शौक से अपने लिए कान का खूबसूरत सा टॉप्स खरीदा था। एक उत्सव में सपरिवार गांव गया। पत्नी के मायके और ससुराल दोनों में महिलाओं ने उस टॉप्स की बड़ी तारीफ की। किसी ने पूछा- तनिष्क से बनवाया क्या तो किसी ने पूछा-जो नग लगे हैं वो हीरे के हैं क्या..? पत्नी ऐसे सवालों पर गदगद थी। मेरे दिल्ली लौटने के चार-पांच दिन बाद श्रीमती जी गांव लौटीं तो एक दिन उन्होंने कहा-ये टॉप्स ठीक नहीं है। मैंने कहा-तुम्हीं तो कह रही थी कि सबने बड़ी तारीफ की। पत्नी ने कहा-हां, लेकिन छोटकी दीदी कह रही थीं कि ये बहुत छोटा है। उत्सव में तो बड़े गहने पहनने चाहिए।
इससे आगे की कहानी की जरूरत नहीं है। उस टॉप्स की प्रशंसा करीब दो दर्जन महिलाओं ने की थी, लेकिन श्रीमती जी को याद रही सिर्फ छोटकी दीदी की बात, जिन्होंने उसे छोटा कहा था। दरअसल हमारे दिल-दिमाग की संरचना ही ऐसी है कि नकारात्मक बातें कभी भूलती नहीं और सकारात्मक बातें याद नहीं रहतीं। स्कूल के दिनों को जरा याद कीजिए, किस मास्टर साहब की याद सबसे पहले आती है, वो जो बहुत शांत थे, अच्छे थे, या फिर वो जो बहुत पिटाई करते थे, जिन्हें देखकर तमाम छात्रों की पैंट गीली हो जाती थी।
मेरी एक रिश्तेदार हैं, मैंने किसी के बारे में भी उनके मुंह से कोई पॉजिटिव बात नहीं सुनी है। एक से दूसरे की बुराई उनकी जुबां पर रहती है। झूठे किस्से गढ़कर वो अपनों को ही बदनाम करती हैं। उनकी आदत लोग जानते हैं, पहचानते हैं, लेकिन उनका हुनर ऐसा है कि जब वो किसी को किसी के खिलाफ भड़काती हैं तो उनका सच जानने वाला भी मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनता है। उनकी बातों को वेद और पुराण मानता है। यही नहीं, महिलाओं में वे बहुत लोकप्रिय हैं। वो महिलाएं भी मिलते ही उनसे सट जाती हैं, जो पीठ पीछे उन्हें गालियां देती हैं।
मैंने कई अच्छे दोस्तों को हमेशा के लिए अलग होते देखा है। बात सिर्फ ये कि दूसरे को कोई बात बुरी लग गई। एक बुरी बात ने दोस्ती तुड़वा दी। जब मैं इलाहाबाद में पढ़ता था तो बनारस में साथ पढ़ा मेरा एक दोस्त मेरे घर आया। मेरा कमरा कॉलोनी में था, मेरा वो दोस्त जोर-जोर से ठहाके मारने लगा, मैंने उसे समझाने की कोशिश की-भाई जरा धीरे, यहां परिवार रहते हैं, आधी रात ठहाके लगाओगे तो लोगों को बुरा लगेगा। बस वो नाराज हो गया। अटैची पैक करने लगा, अभी बनारस जाऊंगा, तुमने ऐसी बात कही कैसे, रोना-धोना, गुस्सा। बहुत प्रिय मित्र था मेरा। मैंने उससे कहा-देखो मैंने बहुत बड़ा अपराध किया है, मानता हूं। अगले पांच मिनट तक कमरे में बैठकर सोच लो कि पिछले सात सालों की दोस्ती में कितने अच्छे दिन हमने साथ गुजारे। कितनी अच्छी बातें हमने कीं, उन सब बातों का आज की बात से हिसाब कर लो। फिर भी लगता है कि आज की बात पिछले सात साल के रिश्ते पर भारी है तो चले जाना, मैं रोकूंगा नहीं, स्टेशन पहुंचाकर आऊंगा। कहने की जरूरत नहीं कि दोस्ती आज भी पक्की है।
ये मन का कौन सा कमाल है कि अगर बड़ा भाई डांट दे, पिता डांट दे, उम्र में बड़ा रिश्तेदार कुछ कह दे तो लोग आसमान सिर पर उठा लेते हैं। बाप-बेटे में तकरार हो जाती है। भाई-भाई में खाई खुद जाती है, बंटवारा हो जाता है। बचपन के दिनों की सारी अलमस्ती भूल जाती है। लेकिन जब दफ्तर में बॉस चीखता है, मां-बहन को छोड़कर बाकी कुछ भी नहीं छोड़ता तो कुछ कर नहीं पाते। जी सर-जी सर करते हुए सुनते रहते हैं। यहां तो बॉस का दर्जा तो बाप से भी ऊपर चला जाता है। ये उनके लिए भी है जो खुद को तीसमार खां समझते हैं। मैं खुद को भी उनसे कुछ अलग नहीं करता।
एक बार एक सर्वे आया था, जिस पर हम लोग प्रोग्राम बनाने की सोच रहे थे। सर्वे ये आया था कि लड़कियां गुड ब्वाय से ज्यादा बैड ब्वाय को पसंद करती हैं। बातें चल रही थीं। एक महिला एंकर ने अपनी राय रखी- ये बात तो सच है कि जो लगातार तारीफों के पुल बांधते हैं, उन्हें लड़कियां कभी भाव नहीं देतीं, लेकिन अगर किसी ने लड़की की किसी बात की बुराई कर दी तो उसे लड़कियां भूल नहीं पातीं। उसने एक महिला का किस्सा भी बताया, जिसमें एक शख्स यूं ही बैठा शून्य में निहारता हुआ कुछ सोच रहा था। उन मोहतरमा को लगा कि वो उन्हें घूर रहा है। वे उठीं और हड़काते हुए उस लड़के से कहा-ये क्या बदतमीजी है, इतनी देर से तुम मुझे घूर क्यों रहे हो।... फिर अंग्रेजी में कुछ गालियां। लड़का उठा और बोला-माफ कीजिएगा, मैडम मेरा टेस्ट इतना बुरा भी नहीं है। एंकर की मानें तो वो महिला लाजवाब हो गई, वहीं पूरे ड्रामे का पैकअप हो गया। मतलब साफ था कि अगर बेचारा सफाई देता तो फंस जाता। बुरी बात बोली, जो गोली की तरह लगी।
आज सुबह घर में मैंने पत्नी से कहा-ये सूट तुम पर अच्छा नहीं लगता, घर में भी मत पहना करो। इसके बाद जब फ्रेश होकर लौटा तो देखा सूट काम वाली बाई के पॉली बैग में बैठकर घर से बाहर के लिए रवाना हो रहा था। इसके बाद मैंने ऐसे ही पूछा-अच्छा तुम्हारी कौन-कौन सी ड्रेस, साड़ी मुझे बहुत ज्यादा पसंद है, क्या तुम्हें याद है। श्रीमती जी, बहुत सोचकर भी बता नहीं पाईं। अच्छाई और बुराई का रिश्ता एक दूसरे से उलट है, लेकिन बुराई तेजी से अपनी तरफ खींचती है। दो दोस्त जब करीब आते हैं, दोस्ती गहराती है तो सबसे पहले वो एक दूसरे की बुराइयां अपनाते हैं। बहुत कम उदाहरण ऐसे होंगे कि सिगरेट पीने वाले दोस्त की सिगरेट न पीने वाले दोस्त ने सिगरेट छुड़वाई हो। उसके उलट सिगरेट न पीने वाला दोस्त सिगरेट पीने वाले दोस्त की संगति में बाद में सिगरेट पीते हुए मिलता है।
घर में उत्सव हो तो उनकी गिनती याद नहीं रहेगी, जो उत्सव में शामिल होकर कितने खुश होंगे, आयोजक को उनकी गणना उंगलियों पर रटी होगी, जिनके नाराज हो जाने का खतरा है। मेरे एक भाई साहब हैं। कई बरस से बोल नहीं रहे थे। प्रणाम करता था, मुंह फेर लेते थे। एक दिन उन्होंने कहा- तुम्हें पता नहीं कि मैं तुमसे नाराज हूं..? मैंने कहा-भइया मेरे लिए तो उनका हिसाब रख पाना ही आसान नहीं जो मुझसे खुश हैं, अब नाराजगी का भी खाता मेंटेन करूं..। कभी दिलो दिमाग की इस स्वाभाविक चाल को जरा पलटकर देखिए। जो आपकी खुशियों का ख्याल रखते हैं, जरा उनको खुश करके देखिए। जो आपके लिए अच्छा सोचते हैं, उनके बारे में अच्छा सोचिए। बुराइयां तो अपनी तरफ खींचेंगी, जरा अच्छाइयों को बुलाकर तो देखिए। अच्छा करने से ज्यादा मुश्किल अच्छा सोचना है। अच्छा सोचेंगे तो अच्छा करने के रास्ते खुलते जाएंगे

Tuesday, 9 June 2015

खुश रहने वाले लोगों की 7 आदतें (The 7 Habits of Happy People)

Friends, खुश रहना मनुष्य का जन्मजात स्वाभाव होता है . आखिर एक छोटा बच्चा अक्सर खुश क्यों रहता है ? क्यों हम कहते हैं कि childhood days life के best days होते हैं ? क्योंकि हम पैदाईशी HAPPY होते हैं ; पर जैसे -जैसे हम बड़े होते हैं हमारा environment, हमरा समाज हमारे अन्दर impurity घोलना शुरू कर देता है ….और धीरे -धीरे impurity का level इतना बढ़ जाता है कि happiness का natural state sadness के natural state में बदलने लगता है .
पर ऐसा सबके साथ नहीं होता है दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी Happy रहने की natural state को बचाए रख पाते हैं और Life-time खुशहाल रहते हैं .
तो क्या ऐसे व्यक्ति हमेशा खुश रहते हैं ? नहीं , औरों की तरह उनके जीवन में भी दुःख-सुख का आना जाना लगा रहता है , पर आम तौर पर ऐसे व्यक्ति व्यर्थ की चिंता में नहीं पड़ते और अक्सर हँसते -मुस्कुराते और खुश रहते हैं .
तो सवाल ये उठता है कि जब ये लोग खुश रह सकते हैं तो बाकी सब क्यों नहीं ?आखिर उनकी ऐसी कौन सी आदतें हैं जो उन्हें दुनिया भर की टेंशन के बीच भी खुशहाल बनाये रखती हैं ? आज इस लेख के जरिये मैं आपके साथ खुशहाल लोगों की 7 आदतें share करने जा रहा हूँ जो शायद आपको भी खुश रहने में मदद करें .तो आइये जानते हैं उन सात आदतों को :
 Habit 1: खुश रहने वाले अच्छाई खोजते हैं बुराई नहीं :
Human beings की natural tendency होती है कि वो negativity को जल्दी catch करते हैं . Psychologists इस tendency को “Negativity bias” कहते हैं . अधिकतर लोग दूसरों में जो कमी होती है उसे जल्दी देख लेते हैं और अच्छाई की तरफ उतना ध्यान नहीं देते पर खुश रहने वाले तो हर एक चीज में , हर एक situation में अच्छाई खोजते हैं , वो ये मानते हैं कि जो होता है अच्छा होता है . किसी भी व्यक्ति में अच्छाई देखना बहुत आसान है ,बस आपको खुद से एक प्रश्न करना है , कि , “ आखिर क्यों यह व्यक्ति अच्छा है ?” , और यकीन जानिये आपका मस्तिष्क आपको ऐसी कई अनुभव और बातें गिना देगा की आप उस व्यक्ति में अच्छाई दिखने लगेगी . एक बात और , आपको अच्छाई सिर्फ लोगों में ही नहीं खोजनी है , बल्कि हर एक situation में आपको positive रहना है और उसमे क्या अच्छा है ये देखना है . For example , अगर आप किसी job interview में select नहीं हुए तो आपको ये सोचना चाहिए कि शायद भागवान ने आपके लिए उससे भी अच्छी job रखी है जो आपको देर-सबेर मिलेगी, और आप किसी अनुभवी व्यक्ति से पूछ भी सकते हैं, वो भी आपको यही बताएगा .
Habit 2: खुश रहने वाले माफ़ करना जानते हैं और माफ़ी माँगना भी :
हर किसी का अपना -अपना ego होता है , जो जाने -अनजाने औरों द्वारा hurt हो सकता है . पर खुश रहने वाले छोटी -मोती बातों को दिल से नहीं लगाते वो माफ़ करना जानते हैं , सिर्फ दूसरों को नहीं बल्कि खुद को भी .
 और इसके उलट यदि ऐसे लोगों से कोई गलती हो जाती है , तो वो माफ़ी मांगने से भी नहीं कतराते . वो जानते हैं कि व्यर्थ का ego उनकी life को complex बनाएगा इसलिए वो “Sorry” बोलने में कभी कंजूसी नहीं करते . मुझसे भी जब गलती होती है तो मैं कभी उसे सही ठहराने की कोशिश नहीं करता और उसे स्वीकार कर के क्षमा मांग लेता हूँ .
माफ़ करना और माफ़ी माँगना आपके दिमाग को हल्का करता है , आपको बेकार की उलझन और परेशान करने वाली thoughts से बचाता है , और as a result आप खुश रहते हैं . शिखा जी द्वारा लिखा गया एक बेहेतरीन लेख “क्षमा करना क्यों है ज़रूरी ?” मैं आपके साथ पहले ही share कर चुका हूँ . यह लेख forgiveness के बारे में आपकी समझ को बेहतर बना सकता है ,
Habit 3: खुश रहने वाले लोग अपने चारो तरफ एक strong support system develop करते हैं :
 ये support system दो pillars पे टिका होता है Family and Friends( F&F). ज़िन्दगी में खुश रहने के लिए F&F का बहुत बड़ा योगदान होता है . भले आपके पास दुनिया भर की दौलत हो , शोहरत हो लेकिन अगर F&F नहीं है तो आप ज्यादा समय तक खुश नहीं रह पायेंगे .
हो सकता है ये आपको बड़ी obvious सी बात लगे , ये लगे की आपके पास भी बड़े अच्छे दोस्त हैं और बहुत प्यार करने वाला परिवार है , लेकिन इस पर थोडा गंभीरता से सोचिये . आपके पास ऐसे कितने friends हैं , जिन्हें आप बिना किसी झिझक के रात के 3 बजे भी phone कर के उठा सकें या कभी भी financial help ले सकें?
 Family and friends को कभी भी for granted नहीं लेना चाहिए , एक strong relationship बनाने के लिए आपको अपने हितों से ऊपर उठ कर देखना होता है . , दूसरे की care करनी होती है , और उन्हें genuinely like करना होता है . जितना हो सके अपने रिश्तों को बेहतर बनाएं , छोटी -छोटी चीजें जैसे कि Birthday wish करना, बधाई देना , सच्ची प्रशंशा करना , मुस्कुराते हुए मिलना , गर्मजोशी से हाथ मिलाना , गले लगना आपके संबंधों को प्रगाढ़ बनता है . और जब आप ऐसा करते हैं तो बदले में आपको भी वही मिलता है और आपकी ज़िन्दगी को खुशहाल बनाता है .
Habit 4: खुश रहने वाले अपने मन का काम करते हैं या जो काम करते हैं उसमे मन लगाते हैं :
यदि आप अपने interest का, अपने मन का काम करते हैं तो definitely वो आपके Happiness Quotient को बढ़ाएगा , लेकिन ज्यादातर लोग इतने lucky नहीं होते , उन्हें ऐसी job या business में लगना पड़ता है जो उनके interest के हिसाब से नहीं होतीं . पर खुश रहने वाले लोग जो काम करते हैं उसी में अपना मन लगा लेते हैं , भले ही parallely वो अपना पसंदीदा काम पाने का प्रयास करते रहे .
मैंने कई बार लोगों को जहाँ job करते हैं उस company की बुराई करते सुना है , अपने काम को दुनिया का सबसे बेकार काम कहते सुना है , ऐसा करना आपकी life को और भी difficult बनता है . खुश रहने वाले अपने काम की बुराई नहीं करते , वो उसके सकारात्मक पहलुओं पर focus करते हैं और उसे enjoy करते हैं .
मगर , यहाँ मैं यह ज़रूर कहना चाहूँगा कि यदि हम दुनिया के सबसे खुशहाल लोगों को देखें तो वो वही लोग होंगे जो अपने मन का काम करते हैं , इसलिए यदि आप जो कर रहे हैं उसे enjoy करना , उससे सीखना अच्छी बात है पर Steve Jobs की कही बात भी याद रखिये: “आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम समझते हों…और बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों.”
Habit 5: खुश रहने वाले हर उस बात पर यकीन नहीं करते जो उनके दिमाग में आती हैं :
Scientists के अनुसार हमारा brain हर रोज़ 60,000 thoughts produce करता है , और एक आम आदमी के case में इनमे से अधिकतर thoughts negative होती हैं . अगर आप daily अपने brain को हज़ारों negative thoughts से feed करेंगे तो खुश रहना तो मुश्किल होगा ही . इसलिए खुश रहने वाले व्यक्ति दिमाग में आ रहे बुरे विचारों को अधिक देर तक पनपने नहीं देते . वो benefit of doubt देना जानते हैं , वो जानते हैं कि हो सकता है जो वो सोच रहे हैं वो गलत हो , जिसे वो बुरा समझ रहे हैं वो अच्छा हो . ऐसा कर के इंसान relax हो जाता है , दरअसल हमारी सोच के हिसाब से brain में ऐसे chemical release होते हैं जो हमारे मूड को खुश या दुखी करते हैं .
जब आप नकारात्मक विचारों को सच मान लेते हैं तो आप का blood pressure बढ़ने लगता है और आप tensionize हो जाते हैं , वहीँ दूसरी तरफ जब आप उस पर doubt कर देते हैं तो आप अनजाने में ही brain को relaxed रहने का signal दे देते हैं .
Habit 6: खुश रहने वाले व्यक्ति अपने जीवन या काम को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ कर देखते हैं :
एक बार एक बूढी औरत कहीं से आ रही थी कि तभी उसने तीन मजदूरों को कोई ईमारत बनाते देखा . उसने पहले मजदूर से पूछा ,” तुम क्या कर रहे हो ?”, “ देखती नहीं मैं ईंटे ढो रहा हूँ .” उसने जवाब दिया .
फिर वो दुसरे मजदूर के पास गयी और उससे भी वही प्रश्न किया ,” तुम क्या कर रहे हो ?” ,” मैं अपने परिवार का पेट पालने के लिए मेहनत – मजदूरी कर रहा हूँ ?’ उत्तर आया .
फिर वह तीसरे मजदूर के पास गयी और पुनः वही प्रश्न किया ,” तुम क्या कर रहे हो ?,
 उस व्यक्ति ने उत्साह के साथ उत्तर दिया , “ मैं इस शहर का सबसे भव्य मंदिर बना रहा हूँ ”
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन तीनों में से कौन सबसे अधिक खुश होगा! दोस्तों, इस मजदूर की तरह ही खुश रहने वाले व्यक्ति अपने काम को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ कर देखते हैं , और ऐसा करना वाकई उन्हें आपार ख़ुशी देता है . ऐसा मैं इसलिए भी कह पा रहा हूँ क्योंकि मैं AchhiKhabar.Com को भी कुछ इसी तरह देखता हूँ . मैं ये सोचता हूँ कि इस site के जरिये मैं लाखों -करोड़ों लोगों की ज़िन्दगी को बेहतर बना सकता हूँ . मैं हमेशा यही प्रयास करता हूँ कि कैसे अच्छी से अच्छी बातें share करूँ कि पढने वालों की life में positive changes आएं , और शायद यही वज़ह है कि मैं इस काम से कभी थकता नहीं हूँ और इसे कर के सचमुच बहुत खुश और संतुष्ट होता हूँ .
Habit 7: खुश रहने वाले व्यक्ति अपनी life में होने वाली चीजों के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं :
खुश रहने वाले व्यक्ति responsibility लेना जानते हैं . अगर उनके साथ कुछ बुरा होता है तो वो इसका blame दूसरों पर नहीं लगाते , बल्कि खुद को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं .For example: अगर वो office के लिए late होते हैं तो traffic jam को नहीं कोसते बल्कि ये सोचते हैं कि थोडा पहले निकलना चाहिए था .
अपनी success का credit दूसरों को भले दे दें लेकिन अपनी failure के लिए खुद को ही जिम्मेदार मानें . जब आप अपने साथ होने वाली बुरी चीजों के लिए दूसरों को दोष देते हैं तो आपके अन्दर क्रोध आता है , पर जब आप खुद को जिम्मेदार मान लेते हैं तो आप थोडा disappoint होते हैं और फिर चीजों को सही करने के प्रयास में जुट जाते हैं . मैं खुद भी अपनी life में होने वाली हर एक अच्छी – बुरी चीज के लिए खुद को जिम्मेदार मानता हूँ . ऐसा करने से मेरी energy दूसरों में fault खोजने की जगह खुद को improve करने में लगती है , और ultimately मेरी happiness को बढाती है .
Friends, हो सकता है आप इनमे से कुछ बातों को already follow करते हों partially या शायद पूरी तरह से . पर यदि किसी भी Habit में खुद को थोडा सा भी improve करेंगे तो वो definitely आपकी happiness को बढ़ाएगा . Personally मुझे Habit 2 में माफ़ करने वाले part को improve करना है . तो चलिए हम सब साथ -साथ अपने Happiness Quotient को बढ़ाते हैं और एक खुशहाल जीवन जीने का प्रयास करते हैं .

5 चीजें जो आपको नहीं करनी चाहिए और क्यों ?

1) दूसरे की बुराई को enjoy करना ये तो हम बचपन से सुनते आ रहे हैं की दुसरे के सामने तीसरे की बुराई नहीं करनी चाहिए , पर एक और बात जो मुझे ज़रूरी लगती है वो ये कि यदि कोई किसी और की बुराई कर रहा है तो हमें उसमे interest नहीं लेना चाहिए और उसे enjoy नहीं करना चाहिए . अगर आप उसमे interest दिखाते हैं तो आप भी कहीं ना कहीं negativity को अपनी ओर attract करते हैं . बेहतर तो यही होगा की आप ऐसे लोगों से दूर रहे पर यदि साथ रहना मजबूरी हो तो आप ऐसे topics पर deaf and dumb हो जाएं , सामने वाला खुद बखुद शांत हो जायेगा . For example यदि कोई किसी का मज़ाक उड़ा रहा हो और आप उस पे हँसे ही नहीं तो शायद वो अगली बार आपके सामने ऐसा ना करे . इस बात को भी समझिये की generally जो लोग आपके सामने औरों का मज़ाक उड़ाते हैं वो औरों के सामने आपका भी मज़ाक उड़ाते होंगे . इसलिए ऐसे लोगों को discourage करना ही ठीक है .
2) अपने अन्दर को दूसरे के बाहर से compare करना इसे इंसानी defect कह लीजिये या कुछ और पर सच ये है की बहुत सारे दुखों का कारण हमारा अपना दुःख ना हो के दूसरे की ख़ुशी होती है . आप इससे ऊपर उठने की कोशिश करिए , इतना याद रखिये की किसी व्यक्ति की असलियत सिर्फ उसे ही पता होती है , हम लोगों के बाहरी यानि नकली रूप को देखते हैं और उसे अपने अन्दर के यानि की असली रूप से compare करते हैं . इसलिए हमें लगता है की सामने वाला हमसे ज्यादा खुश है , पर हकीकत ये है की ऐसे comparison का कोई मतलब ही नहीं होता है . आपको सिर्फ अपने आप को improve करते जाना है और व्यर्थ की comparison नहीं करनी है.
3) किसी काम के लिए दूसरों पर depend करना मैंने कई बार देखा है की लोग अपने ज़रूरी काम भी बस इसलिए पूरा नहीं कर पाते क्योंकि वो किसी और पे depend करते हैं . किसी व्यक्ति विशेष पर depend मत रहिये . आपका goal; समय सीमा के अन्दर task का complete करना होना चाहिए , अब अगर आपका best friend तत्काल आपकी मदद नहीं कर पा रहा है तो आप किसी और की मदद ले सकते हैं , या संभव हो तो आप अकेले भी वो काम कर सकते हैं . ऐसा करने से आपका confidence बढेगा , ऐसे लोग जो छोटे छोटे कामों को करने में आत्मनिर्भर होते हैं वही आगे चल कर बड़े -बड़े challenges भी पार कर लेते हैं , तो इस चीज को अपनी habit में लाइए : ये ज़रूरी है की काम पूरा हो ये नहीं की किसी व्यक्ति विशेष की मदद से ही पूरा हो .
4) जो बीत गया उस पर बार बार अफ़सोस करना अगर आपके साथ past में कुछ ऐसा हुआ है जो आपको दुखी करता है तो उसके बारे में एक बार अफ़सोस करिए…दो बार करिए….पर तीसरी बार मत करिए . उस incident से जो सीख ले सकते हैं वो लीजिये और आगे का देखिये . जो लोग अपना रोना दूसरों के सामने बार-बार रोते हैं उसके साथ लोग sympathy दिखाने की बजाये उससे कटने लगते हैं . हर किसी की अपनी समस्याएं हैं और कोई भी ऐसे लोगों को नहीं पसंद करता जो life को happy बनाने की जगह sad बनाए . और अगर आप ऐसा करते हैं तो किसी और से ज्यादा आप ही का नुकसान होता है . आप past में ही फंसे रह जाते हैं , और ना इस पल को जी पाते हैं और ना future के लिए खुद को prepare कर पाते हैं . 
5) जो नहीं चाहते हैं उसपर focus करना सम्पूर्ण ब्रह्मांड में हम जिस चीज पर ध्यान केंद्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है. इसलिए आप जो होते देखना चाहते हैं उस पर focus करिए , उस बारे में बात करिए ना की ऐसी चीजें जो आप नहीं चाहते हैं . For example: यदि आप अपनी income बढ़ाना चाहते हैं तो बढती महंगाई और खर्चों पर हर वक़्त मत बात कीजिये बल्कि नयी opportunities और income generating ideas पर बात कीजिये .