Friday, 12 June 2015

कमरतोड़ मेहनत करने के बाद घर में घुसते हीं निठल्ले बैठे

एक माँ की “दिल छु लेनेवाली कहानी” 
दिन भर कमरतोड़ मेहनत करने के बाद घर में घुसते हीं निठल्ले बैठे उनके पति ने कहा —अरे सुनो आज दिहाड़ी(दैनिक मजदूरी)तो मिल हीं गया होगी, 
चल जल्दी से बीस रुपए का नोट निकाल, इंतज़ार में मैं कब से बैठा हूँ. मालूम है न कई दिन हो गए कंठ सूख रहा है.
 अध्धा या पौआ कुछ तो ले आऊं, बेचैन हो रहा हूँ. पत्नी के कान में जैसे हीं ये आवाज आई, वो बुदबुदाने लगी और बोली — निठल्ला खुद तो दिन भरकुछ करता नहीं है और बड़ा आया मुझसे पैसा माँगने.
 और फिर बोल पड़ी, 
नहीं हैं मेरे पास रुपए तुम्हे देने के लिए. इतना सुनते हीं पतिदेव की पौरुष शक्ति जाग पड़ी और फिर से जोर से चिल्लाकर बोला—अरे सुनाई नहीं दिया तुम्हे —- जल्दी निकाल वरना !
पत्नी फिर से बोल पड़ी —बोली न नहीं है मेरे पास . इसके बाद वो गुस्सा से आग बबुला होकर वो सामने आकर बोला देख चुपचाप रुपए निकाल, वरना घुस्सा मारकर अधमरा कर डालूँगा, दिमाग मत ख़राब कर मेरा, अब जल्दी निकाल. चल बीस नहीं तो दस हीं निकाल..
पत्नी बोली : नहीं हैं मेरे पास दस रुपए. इतना सुनते हीं वह घुस्से और लात अपनी पत्नी पर बरसाने लगा. और रात भर वो अपनी मर्दानगी अपने दिन भरकी मेहनत करके आई पत्नी पर दिखाता रहा. सुबह हुई उनके घर में एक छोटा सा बच्चा जो डरा सहमा हुआ माँ की गोद में आया और बोला: माँ-माँ,आज फिर मेरी स्कुल में पिटाई होगी…..
 क्यूंकी किताब के लिए रुपए नहीं होगा देने के लिए. कल हीं मैडम ने रुपए लेकर आने के लिए बोला :नहीं तो पिटाई की बात कही है. 
माँ ने बेटा को बड़े प्यार से अश्रु आँख में लिए —— और खुशहोकर बोली— — बेटा तुम्हारी स्कुल में मारन खानी पड़े इसलिए तो मैं सारी रात तेरे बाप से मार खाती रहीं.
 फिर बीस रुपए निकालकर—– अपने बेटे को दिए . बच्चे नेअपनी माँ की ओर देखा और गले लगा लिया।
 सीख- मां अपने बच्चो के लिए हर दुःख सह लेती है, कुछ भी कर गुजरती है, माँ का सम्मान करना चाहिए !

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