प्रीत के बदले प्रीत निभाना, सबके बस की बात नहीं
गीत के साज सजाए दिल से, सबके बस की बात नही !
गायक तन्हाई का, शम्मा महफिल की बन जाता हूँ
बुझते दिल के दीप जलाए,सबके बस की बात नही !
जरा सी तन्हाई मन को, कितना व्याकुल कर जाती
तन्हाई का जश्न मनाये, सबके बस की बात नही !
दर्द मिले जो दर्द को जाना, गीत दर्द बन गाता हूँ
सबके दर्द में अश्क बहाये, सबके बस की बात नही !
कोई बुराई सबमें सबको, दिख जाये
आसानी से
खुद में छिपी बुराई देखे, सबके बस की बात नही !
जीने को सब जी लेते हैं, जीवन के अहसासों से
मौत के बाद भी जिन्दा हो, सबके बस की बात नही !!
रंग से रंग मिलाने आते योगी होली के बहाने से
से दिल का रंग मिलाये, सबके बस की बात नहीं !!
यह रचना क्यों ?
जिंदगी खुद में पल-पल खामोश आती एक मौत है.
पल को जी लेना और आने वाले हर पल के मौत
को जिंदा कर जाना,
सच सके बस की बात नही .
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