Friday, 12 June 2015

ख्‍बाबों ने सपनों में आना छोड दिया

“हंसी ने लबों पर थिरकना छोड दिया,
ख्‍बाबों ने सपनों में आना छोड दिया,
नहीं आती अब तो हिचकीया भी,
शायद आपने भी याद करना छोड’ दिया ”

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