आफताब है वो मेरा सहर कर रहा है
दीदार धीरे धीरे असर कर रहा है
न दिल पास में है ना धड़कन बची है
मुहब्बत का मौसम ग़ज़ल गा रहा है
संवरती हूँ जब भी आईने के सामने
प्यार से उसके मेरा बदन खिल रहा है
शबनम बन बिखरती फिजाओं में हूँ
फ़रिश्ता हिफाजत मेरी कर रहा है
प्यार मैं भी करती हूँ उससे इस तरह
जैसे मस्जिद में कोई दुआ कर रहा है
दीदार धीरे धीरे असर कर रहा है
न दिल पास में है ना धड़कन बची है
मुहब्बत का मौसम ग़ज़ल गा रहा है
संवरती हूँ जब भी आईने के सामने
प्यार से उसके मेरा बदन खिल रहा है
शबनम बन बिखरती फिजाओं में हूँ
फ़रिश्ता हिफाजत मेरी कर रहा है
प्यार मैं भी करती हूँ उससे इस तरह
जैसे मस्जिद में कोई दुआ कर रहा है
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