Sunday, 31 May 2015

गुलाबी दुनिया में सूने खंडहर


तुम कितनी सुंदर लगती हो जब हो 
जाती हो तुम उदास ज्यों किसी 
गुलाबी दुनिया में सूने खंडहर के 
आसपास मदभरी चांदनी जगती हो! 
मुख पर ढ़क लेती हो आंचल ज्यों डूब रहे 
रवि पर बादल या दिन भर उड़कर थकी
किरण सो जाती हो पांखे समेट, 
आंचल में अलस उदासी बन 
दो भूले भटके सांध्य विहग,
 पुतली में कर लेते निवास तुम
 कितनी सुंदर लगती हो 
जब हो जाती हो तुम उदास

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