तुम कितनी सुंदर लगती हो
जब हो
जाती हो तुम उदास
ज्यों किसी
गुलाबी दुनिया में सूने खंडहर के
आसपास
मदभरी चांदनी जगती हो!
मुख पर ढ़क लेती हो आंचल
ज्यों डूब रहे
रवि पर बादल
या दिन भर उड़कर थकी
किरण
सो जाती हो पांखे समेट,
आंचल में अलस उदासी बन
दो भूले भटके सांध्य विहग,
पुतली में कर लेते निवास
तुम
कितनी सुंदर लगती हो
जब हो जाती हो तुम उदास
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