Sunday, 31 May 2015

नीली झील में छिपकर जो चाँद बैठा है

नीली झील में छिपकर
जो चाँद बैठा है
तुम हाथ बढ़ाकर हटा दो
पानी निकाल लाओ
मेरे लिए और पहना दो
कभी कलाइयों में कंगन
सा कभी कानों में बालियों सा
बादलों को हटा कर कुछ
तारे तोड़ लेना
मेरी पायल में टांक
दो सितारों के घुँघरू
या अंगूठी में मोती सा
जड़ देना यूँ ही खेलें चाँद
तारों से हम तुम यूँ ही
रोके रहें रात और फिर छोड़ दें
इसे सागर तक बहते दरिया में .....

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