Sunday, 17 May 2015

जीवन का अर्थ समझ जाता है

बहती रूकती इस जिन्दगी में कभी हरियाली होती है तो कभी पतझड़ आता है लेकिन जिन्दगी कभी रूकती नहीं. बहती जा रही इस जिन्दगी में कभी प्यार के दीप जलते है तो कभी अँधेरा छा जाता है शायद ऐसे ही अर्थ पता है जीवन हमारे अन्दर कभी- कभी एक तड़प का एहसास होता है कि कोई ऐसा हो जो बिना कहे हमारी कही को समझ ले.इसी खोज में पूरा जीवन बीत जाता है.किसी ने मुझ से कहा था जिन्दगी के सारे माने हमारे भीतर है जो जितना इसे पकड़ लेता है उतना ही जीवन का अर्थ समझ जाता है.नहीं तो हमेशा वो एक छटपटाहट के साथ जीता रहता है.

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