मुझे अंजाम न लिक्खो मेरा अंजाम बन जाओ |
अगर लिखते हो सुबहा तो सुहानी शाम बन जाओ |
जुड़ो ऐसे कि दोनों में कोई दूरी न रह जाए |
मेरी किस्मत की तहरीरों में लिक्खा नाम बन जाओ ||
तुम्हारी बातों में कुछ कुछ नशा महसूस होता है|
करो बाहों को मयखाना हमारे जाम बन जाओ||
ज़माने ने नवाज़ी जो मुझे तोहमत हज़ारों हैं |
मेरे हिस्से में तुम आओ मेरा ईनाम बन जाओ||
मैं पागल सी जिसे ढूंढा करूँ अपनी किताबों में |
किसी पन्ने पे छोटा सा वही पैगाम बन जाओ||
अगर लिखते हो सुबहा तो सुहानी शाम बन जाओ |
जुड़ो ऐसे कि दोनों में कोई दूरी न रह जाए |
मेरी किस्मत की तहरीरों में लिक्खा नाम बन जाओ ||
तुम्हारी बातों में कुछ कुछ नशा महसूस होता है|
करो बाहों को मयखाना हमारे जाम बन जाओ||
ज़माने ने नवाज़ी जो मुझे तोहमत हज़ारों हैं |
मेरे हिस्से में तुम आओ मेरा ईनाम बन जाओ||
मैं पागल सी जिसे ढूंढा करूँ अपनी किताबों में |
किसी पन्ने पे छोटा सा वही पैगाम बन जाओ||
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