Sunday, 24 May 2015

बिंदी कुमकुम चूड़ी पायल

आओ घर में आँगन बोयें
और बोयें इक चाँद
तुलसी चौरा संग प्रभाती
दीप जले हर साँझ
बिंदी कुमकुम चूड़ी पायल
जीवन हो संगीत
अम्मा बाबा से मिल जाये
आँचल भर आशीष
ड्योढ़ी पर की नीम
ठाँव फिर हो जाये चलो
कि एक बार साथी
हम फिर गाँव हो जायें

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