Sunday, 3 May 2015

पढ़ें जरूर ये 12 सवाल घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं

बेंगलुरू। महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा से के खिलाफ आवाज उठाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसकी एक बड़ी वजह होती है महिलाओं को घरेलू हिंसा के खिलाफ कैसे शिकायत दर्ज करायी जाए उसकी सही जानकारी नहीं होती है।
 भारत में घरेलू हिंसा के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (पीडब्‍ल्‍यूडीवीए) मौजूद है। इस कानून के तहत अगर घरेलू हिंसा का शिकार हैं तो आप इसके खिलाफ आवाज उठा सकती हैं और पुलिस में इसकी शिकायत भी दर्ज करा सकती हैं। कई सारे सवालों से पीड़‍ित महिला का सामना होता है। इस प्रक्रिया में आने वाली अड़चन को हम सवाल और जवाब के माध्यम से देने की कोशिश कर रहे हैं, जो आपको शिकायत दर्ज कराते समय काफी मददगार साबित हो सकता हैं-
सवाल 1. महिला किसके विरूद्ध शिकायत कर सकती है?
जवाब- महिला हिंसा का अपराध (धारा-2(Q) के तहत किसी भी वयस्‍क पुरूष के विरूद्ध शिकायत दर्ज करा सकती है। ऐसे मामलों में जब महिला विवाहित है और विवाह की तरह संबंध में रह रही है, तो वह हिंसा, अपराध करने वाले पति/पुरूष के पुरूष या महिला संबंधियों के विरूद्ध भी शिकायत दर्ज करा सकती है। पीडब्‍ल्‍यूडीवीए में भारतीय दंड संहिता की धारा-498ए के अंतर्गत धारा-2(Q) शामिल किया गया। इससे क्रूरता के लिए पति के संबंधियों, चाहे वह पुरूष या महिला हो, के खिलाफ मुकदमा चलाना संभव है। ऐसे उदाहरणों में सास, ससुर, ननद आदि आते हैं।
सवाल 2. धारा 2 (Q) के तहत संबंधियों की परिभाषा में कौन आते हैं? 
 जवाब- पीडब्‍ल्‍यूडीवीए में संबंधी शब्‍द परिभाषित नहीं किया गया है। इसलिए इसका सामान्‍य अर्थ निकालना होगा। संबंधियों के उदाहरण पिता, माता, बहन, चाचा, ताऊ और पीड़ित का भाई अनुच्‍छेद 2(Q) में संबंधी के रूप में शामिल किये जा सकते हैं। अनुच्‍छेद 498ए संबंधी शब्‍द का इस्‍तेमाल करता है, जोकि परिभाषित नहीं है। इस तरह संबंधी शब्‍द का सामान्‍य अर्थ में महिला संबंधी भी शामिल होंगी।
 सवाल 3. क्‍या एक पत्‍नी अपने पति के महिला संबंधियों जैसे सास, ननद के विरूद्ध शिकायत दर्ज करा सकती है? 
 जवाब- हां, पति के महिला संबंधियों के विरूद्ध आदेश जारी किये जा सकते हैं। लेकिन अनुच्‍छेद 19(1) के प्रावधान के अनुसार महिला संबंधी के विरूद्ध बेदखली की छूट नहीं दी जा सकती। अनुच्‍छेद 19(1) की राय में अनुच्‍छेद 19 (1 B) के तहत प्रतिवादी (महिला) को साझी गृहस्‍थी से हटाने का आदेश पारित करने का निर्देश नहीं देता। पीडि़त महिला अपने पति के पुरुष संबंधियों या अन्‍य पुरुष साथियों के विरूद्ध सुरक्षा प्राप्‍त कर सकती है। भरण-पोषण भत्‍ता (मौद्रिक सहायता के लिए आदेशों के तहत) वही व्‍यक्ति प्राप्‍त कर सकते हैं, जो अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दायरे में आते हैं। 
 सवाल 4. क्‍या एक सास अपनी बहू के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज करा सकती है? 
जवाब- नहीं, सांस बहू के विरूद्ध आवेदन नहीं कर सकती (अनुच्‍छेद 2 (Q), लेकिन पुत्र और बहू के हाथों हिंसा झेल रही सास अपने बेटे और बहू के विरूद्ध, बेटे द्वारा किये गये हिंसा अपराध में बढ़ावा देने के लिए, आवेदन दायर कर सकती है। लेकिन सास साझी गृहस्‍थी से बहू की बेदखली की मांग नहीं कर सकती। अब कुछ सवाल जो घरेलू हिंसा से जुड़े हैं 
 सवाल 5. घरेलू दुर्घटना रिपोर्ट (डीआईआर) क्‍या है?
 जवाब- पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के फार्म 1 में डीआईआर का प्रारूप दिया गया है। पीडित महिला इसका इस्‍तेमाल संरक्षा अधिकारी और सेवा प्रदाता के समक्ष घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराने के लिए कर सकती है। यह इस तथ्‍य का रिकॉर्ड होता है कि हिंसा की घटना की रिपोर्ट की गई है, यह एनसीआर (गैर दंडनीय अपराध रिपोर्ट) की तरह होता है। इसे संरक्षा अधिकारी या पंजीकृत सेवा प्रदाता द्वारा करना पड़ता है और हस्‍ताक्षर करना पड़ता है। यह सार्वजनिक दस्‍तावेज है। 
सवाल 6. डीआईआर कैसे रिकॉर्ड किया जाता है? 
जवाब- डीआईआर को महिला के सच्‍चे बयान को विश्‍वास रूप में रिकॉर्ड किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि सभी तरह की शिकायतें पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के दायरे में पक्षपात रहित रूप में दर्ज की जानी चाहिए। अगर कोई महिला अपनी पीड़ा नहीं बता पाती, तब संरक्षा अधिकारी उसे बाद में डीआईआर भरने के लिए बुला सकते हैं। संरक्षा अधिकारी महिला के आगमन संबंधी ब्‍योरों का दैनिक डायरी रखेंगे। 
सवाल 7. डीआईआर रिकॉर्ड होने के बाद क्‍या किया जाता है? 
जवाब- संरक्षा अधिकारी डीआईआर को मजिस्‍ट्रेट के पास भेज देते हैं। डीआईआर की एक प्रति क्षेत्राधिकार में आने वाले थाने के प्रभारी को अग्रसारित की जाएगी। यदि महिला चाहे तो सेवा प्रदाता डीआईआर को संरक्षा अधिकारी तथा मजिस्‍ट्रेट को भेज सकता है। ऐसे मामलों में न्‍यायालय में दाखिल आवेदन के साथ डीआईआर संलग्‍न होना चाहिए। 
 सवाल 8. डीआईआर प्राप्ति पर मजिस्‍ट्रेट को क्‍या करना चाहिए? 
जवाब- मजिस्‍ट्रेट रिकॉर्ड रखने के लिए डीआईआर सुरक्षित रखेंगे। पीडित महिला द्वारा दाखिल किसी मामले में इसको भेजा जा सकता है। इसका इस्‍तेमाल वैसे मामलों में भी हो सकता है, जो मामला संरक्षा अधिकारी की सहायता से दायर हो और डीआईआर बाद में दिया जाए। 
सवाल 9. क्‍या पीड़ित महिला या उसके वकील द्वारा डीआईआर भरा जा सकता है? 
जवाब- नहीं, संरक्षा अधिकारी या पंजीकृत सेवा प्रदाता फार्म-1 में डीआईआर भरेंगे और इस पर दोनों में से एक का हस्‍ताक्षर होगा। चूंकि डीआईआर सार्वजनिक दस्‍तावेज है, इसलिए इसे कोई सरकारी अधिकारी ही भरेगा। अनुच्‍छेद 30 पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के अंतर्गत अपने कार्यों के संपादन में सभी संरक्षा अधिकारियों और सेवा प्रदाताओं को लोक सेवक मानता है। 
सवाल 10. क्‍या पीड़‍ित महिला डीआईआर के बिना आवेदन भर सकती है?
 जवाब- हां, पीड़‍ित महिला राहत के लिए डीआईआर भरे बिना आवेदन दे सकती है। 
सवाल 11. जहां महिला राहत के लिए आवेदन करती है, 
वहां मजिस्‍ट्रेट को केस दर्ज हो जाने के बाद डीआईआर की मांग करनी चाहिए? जवाब- न्‍यायालय में आवेदन देते समय डीआईआर की कोई आवश्‍यकता नहीं है, क्‍योंकि डीआईआर का चरण और उद्देश्‍य (हिंसा, घटना की रिकार्डिंग) अस्तित्‍व में नहीं रहता। एक बार न्‍यायालय में आवेदन दाखिल किये जाने के बाद मजिस्‍ट्रेट संरक्षा अधिकारी को घर का दौरा करने का आदेश दे सकता है या नियम 10 (1) के अंतर्गत परिस्थिति के अनुसार रिपोर्ट का आदेश दे सकता है।
 सवाल 12. क्‍या संरक्षा अधिकारी डीआईआर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए घर जा सकता है? 
 जवाब- नहीं, संरक्षा अधिकारी न्‍यायालय के आदेश के बिना घर का दौरा नहीं कर सकता।

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