मैंने देख ही लिया एक दिन
सूरज को आँखें मलते
सूरज को आँखें मलते
नदियो को इठलाते हुए
चिड़ियों को चहचहाते हुए
फूलों में रंग आते हुए
फिर देखा उनको शरमाते हुए
सारस को देखा प्यार में खो जाते हुए
पेड़ो को देख झूम-झूम के गीत गाते हुए
इन सबको देख कर धरती को मुस्कुराते हुए
और एक दिन मैंने देखा अपने को
इन सब में खो जाते हुए ,
अपनी जिन्दगी को बच्चो सा मुस्कुराते हुए
मैंने देखा.
No comments:
Post a Comment