Friday, 8 May 2015

एक दिन मैंने मैंने देख ही लिया

मैंने देख ही लिया एक दिन
 सूरज को आँखें मलते 

 नदियो को इठलाते हुए
 चिड़ियों को चहचहाते हुए
 फूलों में रंग आते हुए 
 फिर देखा  उनको शरमाते हुए 
 सारस को देखा प्यार में खो जाते हुए 
 पेड़ो को देख झूम-झूम के गीत गाते हुए 
 इन सबको देख कर धरती को मुस्कुराते हुए 
 और एक दिन मैंने देखा अपने को 
 इन सब में खो जाते हुए ,
 अपनी जिन्दगी को बच्चो सा मुस्कुराते हुए 
 मैंने देखा.

No comments:

Post a Comment