Saturday, 2 May 2015

एक हंसी के लिये वक़्त नहीं

हर ख़ुशी है लोंगों के दामन में , 
पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं . 
दिन रात दौड़ती दुनिया में ,
 ज़िन्दगी के लिये ही वक़्त नहीं . 

 सारे रिश्तों को तो हम मार चुके, 
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं ..
 सारे नाम मोबाइल में हैं ,
 पर दोस्ती के लिये वक़्त नहीं .

 गैरों की क्या बात करें , 
जब अपनों के लिये ही वक़्त नहीं . 
 आखों में है नींद भरी , 
पर सोने का वक़्त नहीं . 

दिल है ग़मो से भरा हुआ , 
पर रोने का भी वक़्त नहीं . 
 पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े, 
की थकने का भी वक़्त नहीं . 

पराये एहसानों की क्या कद्र करें ,
 जब अपने सपनों के लिये ही वक़्त नहीं तू ही बता ऐ ज़िन्दगी ,
 इस ज़िन्दगी का क्या होगा, की हर पल मरने वालों को , 
जीने के लिये भी वक़्त नहीं …….

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