पल भर में शबनम,पल भर मे शोला,
शातिर तू है और मैं कितना भोला.
पतझड़ मे सावन और सावन मे बारिश,
तू है जैसे मेरे बरसों की ख्वाहिश.
अरबों की दौलत और दौलत की दुनिया,
आती है महफ़िल मे तुझसे ही खुशियाँ.
नयनों मे काजल और माथे पर बिंदिया,
उड़ा ले जाती है मेरी रातों की निंदिया.
तुझसे ही है रास्ता तुझसे ही है मंज़िल,
मेरे दिल की है ख्वाहिश तू कब होगी हासिल.
शातिर तू है और मैं कितना भोला.
पतझड़ मे सावन और सावन मे बारिश,
तू है जैसे मेरे बरसों की ख्वाहिश.
अरबों की दौलत और दौलत की दुनिया,
आती है महफ़िल मे तुझसे ही खुशियाँ.
नयनों मे काजल और माथे पर बिंदिया,
उड़ा ले जाती है मेरी रातों की निंदिया.
तुझसे ही है रास्ता तुझसे ही है मंज़िल,
मेरे दिल की है ख्वाहिश तू कब होगी हासिल.
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