ये कविता आप सभी को समर्पित हें…………………….
इस कविता के दुआर आप को आज से करीबन २० वर्ष पूर्व ले जाना चाहता हु ,ये कविता उन गावो की हें जो समय के साथ बदल गये हें .
मेरे गाव के उस पनघट पर पहेले बाला आती थी !
बाला वाला क्या करते हो वो पनघट अब कहा रहा….
मेरे गाव के उस टीले पर पहेले मेला लगता था !
मेल जमेले क्या करते हो वो टीला भी कहा रहा !
मेरे गाव के उस मंदिर पर पहेले घंटा बजता था !
घंटा वंटा क्या करते हो वो मंदिर अब कहा रहा !
मेरे गाव के चोपालो पर पहेले झमगट लगता था !
नाही वे ये लोग रहे हें नाही वे चोपाल रही ………
मेरे गाव के उस गली में मेरी म्हेबुबा रहती थी !
म्हेबुबा व्हेबुबा क्या करते हो वो गली अब कहा रही !
मेरे गाव के चोपालो पर पहेले जेसा हाल कहा !
नाही वे ये लोग रहे हें नाही वे चोपाल रही ………
मेरे गाव के उस रहा पर पहेले गाये आती थी !
गाये वाये क्या करते हो वो गाये अब कहा रही !
सावन के महीने में पहेले झुळॆ लगते थे !
झुळॆ वूले क्या करते हो वो सावन अब कहा रहा !
मेरे गाव के चोपालो पर पहेले जेसा हाल कहा …………….
इस कविता के दुआर आप को आज से करीबन २० वर्ष पूर्व ले जाना चाहता हु ,ये कविता उन गावो की हें जो समय के साथ बदल गये हें .
मेरे गाव के उस पनघट पर पहेले बाला आती थी !
बाला वाला क्या करते हो वो पनघट अब कहा रहा….
मेरे गाव के उस टीले पर पहेले मेला लगता था !
मेल जमेले क्या करते हो वो टीला भी कहा रहा !
मेरे गाव के उस मंदिर पर पहेले घंटा बजता था !
घंटा वंटा क्या करते हो वो मंदिर अब कहा रहा !
मेरे गाव के चोपालो पर पहेले झमगट लगता था !
नाही वे ये लोग रहे हें नाही वे चोपाल रही ………
मेरे गाव के उस गली में मेरी म्हेबुबा रहती थी !
म्हेबुबा व्हेबुबा क्या करते हो वो गली अब कहा रही !
मेरे गाव के चोपालो पर पहेले जेसा हाल कहा !
नाही वे ये लोग रहे हें नाही वे चोपाल रही ………
मेरे गाव के उस रहा पर पहेले गाये आती थी !
गाये वाये क्या करते हो वो गाये अब कहा रही !
सावन के महीने में पहेले झुळॆ लगते थे !
झुळॆ वूले क्या करते हो वो सावन अब कहा रहा !
मेरे गाव के चोपालो पर पहेले जेसा हाल कहा …………….
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