Sunday, 26 July 2015

दिल गदगद हो गया

सुनो!
कल दिल गदगद हो गया
जब देखा तुम्हारी संवेदना का प्रदर्शन
जो हो रहा था बीच चौराहे पर
जिसमे एक मूक जानवर
चाट रहा था तुम्हारे तलुए
और तुम ख़ुशी से झूमते हुए
लगा रहे थे बिस्किटों का अम्बार
जिसे वो कुछ खा रहा था
और कुछ छोड़ रहा थाशायद
उसकी नजर पड़ गयी थीकुछ
बिखरे बालों वाले मासूम
चेहरों परऔर जाग गयी थी
उसकी जानवरी संवेदना
 सुनो!
कल देखा था तुमको
लगाते हुए टकीला का शॉट
उफ़! कितना झूम रहे थे तुम
अपने अधनंगे दोस्तों के साथ
और आजाद हो रहे थे 
तुम्हारे हाथों से वो नोट
जो न जाने कबसे गुलाम थे 
तुम्हारी बन्द तिजोरी के
हाँ ये अलग बात है की
आज ही रामू को
दिया नही था तुमने 
वो 1200 रूपये 
कैलकुलेटर खराब होने के कारण
जो की गिन लिया था उसने
अपनी काँपती उँगलियों पर

सुनो!
आज तुमने किया है उदघाट्न
शहर के बहुत बड़े अस्पताल का
अहा! अब बचेंगी लाखों जिंदगी
इस चमकते और रंगीन शहर की
हाँ ये बात और है की
घर में बूढ़े बाबा की दवाई
पिछले दो दिनों से भूल रहे हो तुम
___________________________

No comments:

Post a Comment