Thursday, 23 July 2015

जब आँख से ओझल भया

छाप-तिलक तज दीन्हीं रे तोसे नैना मिला के ।
प्रेम बटी का मदवा पिला के,
मतबारी कर दीन्हीं रे मोंसे नैना मिला के ।
खुसरो निज़ाम पै बलि-बलि जइए
मोहे सुहागन कीन्हीं रे मोसे नैना मिला के ।
जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर 
 ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर । 
जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा 
जिया हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर ।
तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर ।
जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ 
तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर । 
मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया 
तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर । 
खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ 
अजब कुदरत खुदा की है अजब, 
जब जिव दिया गुल लाय कर ।

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