तय तो कर लेते हैं वो
कई कई किलोमीटर लम्बे रास्ते
कितने ही समुद्र गुज़रते हैं
कितनी ही नदियाँ लांघ कर
पहुंच ही जाते हैं पिया के देस तक होते हैं
जब सामने तो तैरने लगता है
पूरा समय आँखों के पटल
पर चलचित्र सा देखते देखते
एकटक खो जाते हैं
आत्माओं में उंगलियाँ
कांपती रहती हैं व्याकुल सी
कि बस बढ़ के छू ही लेंगे
गले लगाकर बदल लेंगे
तुम्हारे दुःख से अपने सुख
लेकिन..............
बस ये लेकिन मैं बढ़ तो जाऊं
तुम्हारी ओर लेकिन क्या
ये ठीक है प्रेम करती हूँ तुम्हें मैं
लेकिन तुम देह रूप में मेरे नहीं
और इस जैसे हज़ारों
लेकिन रोक लेते हैं कदम
सिखाने लगते हैं मर्यादा संस्कार
गिनवाने लगते रिश्ते
उत्तरदायित्व कई कई रूप
लिए ये लेकिन सांसों से जीवन
मांग लेते हैं और एक उम्र का
इंतजार तय करके आए
दो जिस्म नहीं लांघ पाते ये
लेकिन की रेखा काश हम
ये दूरी तय कर पाते काश ये
लेकिन न होता
....................................कनुप्रिया
कई कई किलोमीटर लम्बे रास्ते
कितने ही समुद्र गुज़रते हैं
कितनी ही नदियाँ लांघ कर
पहुंच ही जाते हैं पिया के देस तक होते हैं
जब सामने तो तैरने लगता है
पूरा समय आँखों के पटल
पर चलचित्र सा देखते देखते
एकटक खो जाते हैं
आत्माओं में उंगलियाँ
कांपती रहती हैं व्याकुल सी
कि बस बढ़ के छू ही लेंगे
गले लगाकर बदल लेंगे
तुम्हारे दुःख से अपने सुख
लेकिन..............
बस ये लेकिन मैं बढ़ तो जाऊं
तुम्हारी ओर लेकिन क्या
ये ठीक है प्रेम करती हूँ तुम्हें मैं
लेकिन तुम देह रूप में मेरे नहीं
और इस जैसे हज़ारों
लेकिन रोक लेते हैं कदम
सिखाने लगते हैं मर्यादा संस्कार
गिनवाने लगते रिश्ते
उत्तरदायित्व कई कई रूप
लिए ये लेकिन सांसों से जीवन
मांग लेते हैं और एक उम्र का
इंतजार तय करके आए
दो जिस्म नहीं लांघ पाते ये
लेकिन की रेखा काश हम
ये दूरी तय कर पाते काश ये
लेकिन न होता
....................................कनुप्रिया
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