Wednesday, 8 July 2015

यें ज़िन्दगी दुश्मनों के साथ रहकर, अपनों को धोका दे जाती हैं

यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं , हर मोड़ पर अपना रंग बदल देती हैं
कोई अपने बेगाने हो जाते हैं ,तो कोई पराया अपना हो जाता हैं
यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं , हर मोड़ पर कुछ नया सिखाती हैं
कभी खुशिया भर -भर के आती है, तो कभी-कभी दुःख के बादल हर रोज बरसते हैं
यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं ,हर मोड़ पर एक नया मुकाम बनाती हैं
इस ज़िन्दगी से हर रोज किसी न किसी को शिकायत होती है ,
तो कोई इसकी प्रशंसा करता हैं यें ज़िन्दगी कभी खामोश रहती हैं ,
और कभी-कभी बिन कहे कुछ कह जाती हैं
 यें ज़िन्दगी दुश्मनों के साथ रहकर, अपनों को धोका दे जाती हैं
यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं , हर मोड़ पर एक नया रंग दे जाती हैं

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