छत खुला आकाश है
हो रहा वज्रपात है
फिर भी नित दिन मैं
गाता राम धुन हूं
गुरु हथौड़ा हाथ में कर रहा
प्रहार है सामने पड़ा हुआ
बच्चा कराह रहा है
फिर भी अपने में मगन
कर्म में तल्लीन हूं
मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं।
आत्मसंतोष को मैंने जीवन का लक्ष्य बनाया
चिथड़े-फटे कपड़ों में सूट पहनने का सुख पाया
मानवता जीवन को सुख-दुख का संगीत है
मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं।
हो रहा वज्रपात है
फिर भी नित दिन मैं
गाता राम धुन हूं
गुरु हथौड़ा हाथ में कर रहा
प्रहार है सामने पड़ा हुआ
बच्चा कराह रहा है
फिर भी अपने में मगन
कर्म में तल्लीन हूं
मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं।
आत्मसंतोष को मैंने जीवन का लक्ष्य बनाया
चिथड़े-फटे कपड़ों में सूट पहनने का सुख पाया
मानवता जीवन को सुख-दुख का संगीत है
मैं एक मजदूर हूं
भगवान की आंखों से मैं दूर हूं।
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