Friday, 17 July 2015

तन -मन से व्याकुल रह के बुलाती हूँ की पी तुम कहाँ हो?

रहिया में तोहरे नयना बिछईली, जाला सजनवा तू जहाँ,
पपीहा के जईसन रहल जतन मन,जियरा पुकारे पी कहाँ??
पहिल-पहिल जब मिलले नज़रिया ,
अँखिया बसल राजा तोरी तस्वीरिया,
तबहिं से तोरा बारे होईले बाबरिया,
जियरा पुकारे पी कहाँ??
हिंदी में --------------------------
तुम्हारे हर राह में आँख बिछाती हूँ
तुम जहाँ भी जाते हो।
पपीहा की तरह तन -मन से व्याकुल रह के बुलाती हूँ की पी तुम कहाँ हो?
जब पहलीबार तुम्हे देखी तबसे ही आँखों में तुम्हारी तस्वीर बसी है
और तभी से तुम्हारे लिये बेकल हूँ।
तन -मन से व्याकुल रह के बुलाती हूँ की पी तुम कहाँ हो?

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