Friday, 10 July 2015

आंसू और खिल उठी मुस्कान मेरे होठों पर

आज यूही बैठे बैठे आंखे भर आई हैं
कहीं से मां की याद दिल को छूने चली आई हैं
आंचल से उसका मुंह पोछना और भाग कर
गोदी मे उठाना रसोई से आती खुशबु
आज फिर मुंह मी पानी ले आई है बसा लिया है
अपना एक नया संसार बन गया हूं
मैं खुद एक का अवतार फिर भी न जाने क्यों
आज मन उछल रहा है बन जाऊं
मै फिर से नादान् पर जब सुनेगी कि रो रहा
उसका बेटा फट से कहेगी उठकर,”बस कर रोना
अब तो हो गया बड़ा फिर प्यार से ले लेगी
अपनी बाहों मे मुझको एक एह्सास दिला देगी
खुदाई का इस दुनियां मे. जाडे की नर्म धूप की तरह
आगोश मे ले लिया उसने इस ख्याल से ही रुक गये
आंसू और खिल उठी मुस्कान मेरे होठों पर

No comments:

Post a Comment