यह कोन हें ?
यह तो चांदनी है जो घर में फेल गयी हें ,
इसे देखकर दूध ओर संगमरमर की छवलताऍ शरमा गयी है !
चाँद ईष्या से जला तो कला पड़ गया ,
एक विचित्र सयोंग है यह तो सरस्वती की पुत्री है !
ज्ञान की देवी है चंचल लक्ष्मी का अवतार है पर विवेक से भरपूर है !
आओ विकू निजु भेरू शली सुशिला ,
इस गुलाबो को खूब पयार करे नाचे कूड़े खुशिया मनाये !
इस लड़ो को खूब लाड़ लडाये ,
कल तो इस की यश और कीर्ति की पताकाऍ दूर दूर तक फहरायेगी !
इसे ससुराल ले जाने को कई आतुर होंगे भीड़ लगेगी लम्बी लाईने लगेगी !
वह सुसराल कितना भाग्शाली होगा , जाहा यह राज करेगी !
जाहा रत्न जडित छत्र के नीचे मखमल पर बैठॆगी दोनों ओर चँवर दुलेगे !
उस दिन लक्श्या दादा दादी को याद करना न मालूम
हम कहा होंगे पर जाहा भी होंगे तुज पर आशीषों के फुल बरसाएगे
यह तो चांदनी है जो घर में फेल गयी हें ,
इसे देखकर दूध ओर संगमरमर की छवलताऍ शरमा गयी है !
चाँद ईष्या से जला तो कला पड़ गया ,
एक विचित्र सयोंग है यह तो सरस्वती की पुत्री है !
ज्ञान की देवी है चंचल लक्ष्मी का अवतार है पर विवेक से भरपूर है !
आओ विकू निजु भेरू शली सुशिला ,
इस गुलाबो को खूब पयार करे नाचे कूड़े खुशिया मनाये !
इस लड़ो को खूब लाड़ लडाये ,
कल तो इस की यश और कीर्ति की पताकाऍ दूर दूर तक फहरायेगी !
इसे ससुराल ले जाने को कई आतुर होंगे भीड़ लगेगी लम्बी लाईने लगेगी !
वह सुसराल कितना भाग्शाली होगा , जाहा यह राज करेगी !
जाहा रत्न जडित छत्र के नीचे मखमल पर बैठॆगी दोनों ओर चँवर दुलेगे !
उस दिन लक्श्या दादा दादी को याद करना न मालूम
हम कहा होंगे पर जाहा भी होंगे तुज पर आशीषों के फुल बरसाएगे
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