Sunday, 26 July 2015

प्रेम एक बड़ा महत्वपूर्ण विषय रहा है।

हमारे यहाँ प्रेम एक बड़ा महत्वपूर्ण विषय रहा है।प्रेम करने वालों के लिए भी और प्रेम न करने वालों के लिए भी।प्रेम करने वालों ने जहाँ इसे अभिव्यक्त करने के भिन्न माध्यम तलाशे है वहीं प्रेम न करने वालों ने हर उस माध्यम को अपनी नजरों में रखा है।ऐसा नही है की प्रेम न करने वालों ने प्रेम नही किया बस उनके प्रेम का स्वरूप दूसरा रहा।तो अब आते है स्टेट्स के मूल विषय पर जो प्रेम की अभिव्यक्ति को लेकर है।दरसल भारत को प्रेम विरासत में मिली है जिसमे स्थल विशेष का विशेष ध्यान रखा गया है।वहीँ जहाँ कोई आता-जाता नही या फिर हीर-राँझा और लैला-मजनू टाइप प्रतिक्रियात्मक प्रेम।यही वजह है की प्रेमी-प्रेमिकाओं में जहाँ ये भावनाएं उमड़ी नही की प्रेम अभिव्यक्त हो जाता है।ये प्रेम बारिश में नाचते हुए अपने प्रेमी-प्रेमिका के नामोच्चारण से अभिव्यक्त हो सकता है या फिर किसी पेड़ पर एक-दुसरे का नाम गोदकर।कुल मिलाकर प्रेम के अभिव्यक्ति की सीमा अनिर्वचनीय है।यह शौचालय की दीवारों से लेकर ऐतिहासिक स्मारकों तक कहीं भी अभिव्यक्त हो सकता है।बाद बाकि प्रेम में असफलता पर प्रतिशोधात्मक शाब्दिक बाणों से लेकर (जिसमे यौन आक्रमण के तहत अंग विशेष से सम्बंधित शब्दों का प्रयोग जिसे आम भाषा में गाली कहते है) तीर-कमानों के रास्ते से गुजरकर अब ये सिलसिला भिन्न वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा एक-दूसरे के प्राण हरने तक पहुँच चुका है।ऐसा नही है की इस प्रतिशोध ने केवल नकारात्मक परिणाम ही दिये है।सकारात्मक परिणामो के तहत इसने कवियों और शायरों की एक श्रृंखला को जन्म दिया है जिसने समय-समय पर अपना फ्रस्ट्रेशन भारी जनसमुदाय को झेलने को विवश किया है....

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