Tuesday, 12 May 2015

क्या है प्रकृति-जीवन और मानव-जीवन के बीच सही सम्बन्ध

''तुमने उस रात को आकाश के तारों तले धरती की उस सुनसान राह पर उस औरत को नहीं अपनाया था, जिससे तुम कह रहे थे कि उससे, तुमने प्रेम किया था'' सच कहूँ, तो 'आदि', 'प्रतिज्ञा' की पृष्ठभूमि में ही स्वयं को समझ सका है और प्रकृति-जीवन और मानव-जीवन के बीच सही सम्बन्ध स्थापित कर सका है. अब वो केवल वो नहीं है जो वो स्वयं को समझता है, वो, वो भी है जो 'प्रतिज्ञा' उसे समझ रही है ! जैसा कि मैंने अनुभूत किया है कि 'प्रतिज्ञा' के सजीव पात्र में अवस्था-सुलभ मन:स्थितियां रूपायित हुई हैं, 'आदि' भले ही तुमने केंद्र में रहते हुए स्वयं को अपने अन्तर्मुखी स्वाभाव के कारण स्त्री जाति की दृष्टि में महान बना लिया हो किन्तु तुम तो भली-भांति जानते हो कि .

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