जरुरत थी या मजबूरी ,
जो तुमने निभायी ये दूरी।
दस्तूर तुम्हारा ऐसा था ,
मैं चाँद कि आस में जगा था।
एक छोटी सी नादानी थी ,
जो रूठी हुई कहानी थी।
एक मौसम जो मेरे साथ था
एक उलझन जो तेरे पास था।
मेरा जिस्म तेरी पनाह में था ,
पर तेरा रूह न जाने किसके पास था।
जो तुमने निभायी ये दूरी।
दस्तूर तुम्हारा ऐसा था ,
मैं चाँद कि आस में जगा था।
एक छोटी सी नादानी थी ,
जो रूठी हुई कहानी थी।
एक मौसम जो मेरे साथ था
एक उलझन जो तेरे पास था।
मेरा जिस्म तेरी पनाह में था ,
पर तेरा रूह न जाने किसके पास था।
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