मुझे वर्तिका एक बना लो
अपने दीपक में जला लो
जलूँ द्वार घर के अंदर में
कोने में इक ओर टिका लो।
गंदा,मन का स्वच्छ बहुत हूँ
सच्चाई का भक्त बहुत हूँ
अपने में अलमस्त बहुत हूँ
जो चाहे मुझसे करवा लो,
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
किसी आँख का मैं तारा हूँ
अपनी माँ का भी प्यारा हूँ
घर से दूर ... थका हारा हूँ
बदहाली में मुझे बिठा लो
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
अपनों से मैं भी छूटा हूँ
चौराहे के बीच लुटा हूँ
किस्मत का मारा फूटा हूँ
दूर भगा मत मुझे बुला लो
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
तेरे घर में नन्हा सूरज
मैं भी किसी कँवल का हूँ
रज सौरभ हूँ मुझको यूँ ना
तज चाँद समझ मत,
पर अपना लो मुझे
वर्तिका एक बना लो ।
कुछ दिन से प्यासा भूखा हूँ
दर दर से माँगा रूखा हूँ
अंदर तक टूटा सूखा हूँ
चलता न कर, मुझे चला लो
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
अपने दीपक में जला लो
जलूँ द्वार घर के अंदर में
कोने में इक ओर टिका लो।
गंदा,मन का स्वच्छ बहुत हूँ
सच्चाई का भक्त बहुत हूँ
अपने में अलमस्त बहुत हूँ
जो चाहे मुझसे करवा लो,
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
किसी आँख का मैं तारा हूँ
अपनी माँ का भी प्यारा हूँ
घर से दूर ... थका हारा हूँ
बदहाली में मुझे बिठा लो
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
अपनों से मैं भी छूटा हूँ
चौराहे के बीच लुटा हूँ
किस्मत का मारा फूटा हूँ
दूर भगा मत मुझे बुला लो
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
तेरे घर में नन्हा सूरज
मैं भी किसी कँवल का हूँ
रज सौरभ हूँ मुझको यूँ ना
तज चाँद समझ मत,
पर अपना लो मुझे
वर्तिका एक बना लो ।
कुछ दिन से प्यासा भूखा हूँ
दर दर से माँगा रूखा हूँ
अंदर तक टूटा सूखा हूँ
चलता न कर, मुझे चला लो
मुझे वर्तिका एक बना लो ।
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