बाबुल तेरे घर का आँगन
भूल नहीं पाऊँगी पी घर
जाकर रहना है अब कैसे रह पाऊँगी ।
इस आँगन में बचपन मेरा ,
इस आँगन में जीवन मेरा ।
कैसे छोड़ चली जाऊँगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी ।
घर के हर इक कोने को मैं
हंसने -गाने- रोने को मैं
कैसे मन से बिसराऊंगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
ज़िद भी की और की शैतानी ,
पल में रूठी ,पल में मानी ।
कैसे कुछ कह पाऊँगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
सारे खेल खिलौने छूटे ,
सखियाँ और बहाने छूटे।
कैसे उनको बुलवाऊंगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी कैसे
वो सब चेहरे होंगे ,
जिस घर मेरे फेरे होंगे ।
कैसे इनमे रह पाऊँगी ,
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
पल में पराया कर देते है ,
क्यूँ बेटी को वर देते हैं ।
कैसे पीढ़ा सह पाऊँगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
बाबुल तेरे घर का आँगन भूल नहीं पाऊँगी।
भूल नहीं पाऊँगी पी घर
जाकर रहना है अब कैसे रह पाऊँगी ।
इस आँगन में बचपन मेरा ,
इस आँगन में जीवन मेरा ।
कैसे छोड़ चली जाऊँगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी ।
घर के हर इक कोने को मैं
हंसने -गाने- रोने को मैं
कैसे मन से बिसराऊंगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
ज़िद भी की और की शैतानी ,
पल में रूठी ,पल में मानी ।
कैसे कुछ कह पाऊँगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
सारे खेल खिलौने छूटे ,
सखियाँ और बहाने छूटे।
कैसे उनको बुलवाऊंगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी कैसे
वो सब चेहरे होंगे ,
जिस घर मेरे फेरे होंगे ।
कैसे इनमे रह पाऊँगी ,
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
पल में पराया कर देते है ,
क्यूँ बेटी को वर देते हैं ।
कैसे पीढ़ा सह पाऊँगी ।
भूल नहीं पाऊँगी
पी घर जाकर रहना है
अब कैसे रह पाऊँगी
बाबुल तेरे घर का आँगन भूल नहीं पाऊँगी।
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