ये प्यास अबुझ से नैनो की बहकर अश्रु बह जाएगी
जिसे पिया मिलन की आस लगी वो किस जल से बुझ पाएगी ।
मत कहियों नैनो को बैरी नैना तो मेरा दर्पण हैं ,
नैनो मे झाँका जो जिसने उससे सब कुछ कह जायेगी ।
जिसे पिया मिलन की आस लगी वो किस जल से बुझ पाएगी ।
मत कहियों नैनो को बैरी नैना तो मेरा दर्पण हैं ,
नैनो मे झाँका जो जिसने उससे सब कुछ कह जायेगी ।
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