Friday, 3 July 2015

डरे सहमे लोगो का हुजूम था

एक खौफजदा दौर में तुम खड़े थे
तुम्हारे आस पास विचारो से पस्त
डरे सहमे लोगो का हुजूम था
तब तुम ग्रेट डिक्टेटर बन आ खड़े होते हो
उनके बीच और ललकारते हो
दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह को और
मुर्दा खामोशी को हटा कर बीखेर देते हो
हसी वो हसी जहाँ से हर हसी हस्ती चली आ रही है
काश वो हसी चली आती हमारे दवार जहाँ
हम हँसते हँसते घर के हिटलर को तुम्हारी
तरह सबक सिखा सकते और अंत
कर सकते उनकी डिक्टेटरशिप का

No comments:

Post a Comment