Monday, 6 July 2015

ऐ जिन्दगी तेरे इतने मिजाज है क्यो

ऐ जिन्दगी तेरे इतने मिजाज है क्यो
सब देते अलग अलग तुझे नाम है क्यो
फूलो से पूछा कहते हैं बस मुस्कान है तू
भवरो के लिए बस प्यार का रस पान है तू
फिर सम्मा कहे क्यो तिल तिल कर के हैं
जलना परवानो के लिए बस प्यार मे है
जलकर मरना एैसा सौतेला तेरा आखिर व्यवहार है क्यो
ऐ………..
धनवान तुझे पैसा अरजन का काम कहे ग्यानी
तो बस ग्यान का प्रचार कहे जो मिल गए
आशिको के लिए इनाम है तू संतो के लिए प्रभू
पाने का पायदान है तू फिर गरीबो के लिए संघर्ष दुख अभाव है क्यो
ऐ…….
सैनिक कहे जंग और बलिदान है
वैध कहे मलहम इलाज का काम हैं
बेगुनाहो के इन्साफ का इन्तजार है
तू जज के लिए फैसले का फरमानहै तू
फिर बूढे रोगी के मौत का इन्तजार हैं क्यो
ऐ………
नदी कहे जीवन एक धारा हैं
सागर कहे लहरो का किनारा हैं
पर्वत कहे अडिग रहना है
 जिन्दगी वसंत कहे हरियाली है
और सिर्फ खुशी पतझर के लिए
नीरस बोझल उचाट हैं क्यो
ऐ……….

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