Saturday, 15 August 2015

जिन्दगी मेँ नम्बरोँ का चक्कर बुरा है।

नम्बरोँ का चक्कर है बुरा.... 
जिन्दगी मेँ नम्बरोँ का चक्कर बुरा है। चाहे वो परीक्षाफल के नम्बर हो या अंगवस्त्र का नम्बर या आई.पी.सी का नम्बर। आज मसान फिल्म देखी थी। एक पिल्ला टाइप दरोगा था, जो एक कपल को होटल मेँ पकड़ लेता है। जिसके चलते लड़का ऑन स्पॉट आत्महत्या कर लेता है और लड़की तथा उसके पिता से ब्लैकमेल करके पैसे ऐठता है। इसके साथ एक लोअर कास्ट और अपर कास्ट की प्रेम कहानी भी चलती है। अजीब बात है, डोम जो अपर कास्ट के शव को ससम्मान दाह करते है वो नीची जाति के है। अगर ऊँची जाति के शव को चील कौए खाँ जाते तब? खैर पुलिस और समाज कपल के प्रति कितना घटिया रवैया रखते है ये बात तो इस पिच्चर से पता ही चल गयी। भारत मेँ संभोग करने की आजादी भले ही कानून दे देँ पर पुलिस दलाल बनकर ब्लैकमेल करने पहुँच जाती है। इधर समाज के कुछ कुंठित लोग इसी आदर्श मेँ जीते है कि जहाँ प्यार है वहाँ संभोग नही। हिन्दी भाषी हमारा भारतवर्ष को यही नही पता कि प्रेम क्या है, वासना क्या है और संभोग क्या है। मजे की बात ये है कि जो चीज नागरिको को अधिकार के रुप मेँ मिली है, उसका प्रवर्तन न होकर जबरन अधिकारो से वंचित किया जाता है। पर जफ हत्या बलात्कार डकैती हो जाये तो पुलिस को सांप सूंघ जाता है। एक बात मैँ आपको साफ कर दू कि अगर आपको कोई पुलिस वाला या वाली ब्लैकमेल करे कि आप किसी पुरुष या स्त्री के साथ सम्बन्धोँ मेँ है तो आप कतई ब्लैकमेल न हो। कानून के सामने किसी की औकात नही है। बेशक थोड़ा लड़ना पड़ता है। पर बाद मेँ डी.जी.पी हो या एस.पी या मंत्री सभी लोग जेल मेँ चक्की पीसते है। आप अगर किसी पुलिसवाले या वाली से परेशान है तो आप न्यायालय मेँ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहाँ परिवाद दाखिल कर सकते है और उच्च न्यायालय मेँ मौलिक अधिकारो के हनन के तहत रिट दाखिल कर सकते है। शरीफ आदमी नंगा नही होना चाहता पर अगर उसे नंगा करोगे तो वो आपका क्या हश्र करेगा आपको नही पता। मसान फिल्म अगर देवी अंगवस्त्र मेँ ही बाहर भागती कि ये पुलिसवाले होटल मेँ धंधा कराने लाये है तो दरोगा जी की दो मिनट मेँ औकात सामने आ जाती। अरे यार अब नंगे तो हो ही गये थोड़ा और नंगा सही। डर के आगे जीत है। अभी इतनी अंधेर नही है।

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