सुन लो कान्हा मेरे कान्हा
मैं सखियों संग न जाऊंगी
मैं तुम संग दिन भर डोलूंगी
देखो कान्हा मेरे कान्हा
जब रास रचाई थी तुमने
मैं तन-मन भूल चुकी थी
सच
तुम भोले-भाले चंचल
से
मोहक चितवन, आमंत्रण से
मुरली मधुर बजा कान्हा
नित लीला नई दिखाते हो
मैं हुई प्रेम में दीवानी
तुम क्यों
ना प्रीति लगाते हो
मैं वारी जाऊं
तुम पर जो
तुम ज्यादा ही
इतराते हो
मैं चोरी कर लूंगी
तुमको
मटके में धर लूंगी
तुमको
खोलूं मटका देखूं
तुमको
इस मटके में रह
जाओगे
मेरे कान्हा
प्यारे कान्हा
देखो कान्हा,
सुन लो कान्हा
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