Saturday, 15 August 2015

महबूब ने मेरी हर बात बदल दी...


हवा के इक झोके ने रुख-ए-ज़िन्दगी बदल दी... 
जाने कहाँ से कहाँ की तय मंजिल बदल दी... 

महबूब ने मेरे जाने कौन सी बात ली दिल पर... 
कि उस बात ने मेरी हर बात बदल दी... 

कोई तकरार हुई होती तो कूछ समझ आता... 
अनजान किसी लम्हे ने सारी कायनात बदल दी... 

हम दिल को बता समझाए बहलाए कैसे...
जब तुम ने मेरी दिन -ओ-रात बदल दी..

नफरत इस हद तक पाल ली दिल में.. 
बोले हमे पसंद करना भी बन्द कर दो...

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