जिन्दगी मेँ बहुत ऊबड़ खाबड़ रास्ते आते है। मेरे ख्याल से अच्छे वक्त का अहसास शायद दो वक्त पर होता होगा। एक तो खुद की सफलता पर दूसरा किसी के प्यार पर। सबसे ज्यादा खराब लाइफ मेँ वो टाइम होता है जब आप पर्वतारोहण कर रहे होते है और आपके अपने आपकी टांग खीँचते है या पर्वत से नीचे गिर जाने की परिस्थितियोँ को पैदा करते है। पर आप इन पर गुस्सा भी नही कर सकते। सामाजिक व्यवस्था ऐसी है। जिसके साथ आप प्रेम के बंधन मेँ बंधे होते है, वो भी खराब वक्त मेँ आपको तोड़ देता है। आपके घोर अपमान का कारण बना व्यक्ति आपके जीवन को पशुवत बनाने की परिस्थितियाँ ला देता है। कभी कभी ऐसा भी होता है, जब हम एकदम अकेले पड़ जाते है। सब सामने होते है फिर भी लाइफ काला पानी की सजा जैसी लगती है। जिन्दगी कुंद हो जाती है। ऐसे मेँ सब्र रखने के सिवा क्या किया जा सकता है? मै जानती हूँ मौत से ज्यादा तो कुछ नही हो सकता। वैसे भी भगवान ने अपना रोल अदा करने के लिये भेजा है। एक दिन चुपचाप ख़ामोशी के साथ चले जायेगेँ।
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