मेरे बचपन के गीतों में
तुम लोरी और कहानी में
तुम मुझमें हर पल हंसती हो
मैं तेरी जैसी ही दिखती हूं
वो दिन जब तुम मुझको ओ मां
गलती पर डांटा करती थी
फिर चुप जाकर कमरे में उस
खुद ही रोया करती थी मां
तुम पहला अक्षर जीवन का
तुम मेरे जीवन की गति हो
खुली आंखों का सुंदर स्वप्न
दुनिया में मेरी शीतल बयार
मैं तेरी छाया हूं देखो
तेरे जैसी ही चलती हूं
तेरे जैसी ही भावुक हूं
तुम जैसी ही रो देती हूं
अपने आंचल की ओट में मां
हर मुश्किल से हमें बचाया तुमने
औरत होने का दंश झेलकर
अभागन कहलाकर
मेरी आजादियों पाबंदियों
और दहलीजों में तुम हो पर मां,
नहीं पूजूंगी तुम्हारी तरह जीवन भर
किसी पत्थर दिल को अपना राम बनाकर
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