ख्वाब आँखों में जगाकर के, सुला देता है|
खूब रोती है नज़र प्यार, भुला देता है |
वो परिंदे सहम गए हैं अब, नहीं आते |
कि ये इंसान है, ज़ेहराब पिला देता है |
ये मुहब्बत यकीन भी तो, बदगुमानी भी |
दिल डराता है तो चेहरा भी खिला देता है |
दोस्ती हासिल-ए-ईमान, ज़िंदगी का सबक |
कहीं कान्हा को सुदामा से, मिला देता है |
फूँक देता है ये तेज़ाब, मुहब्बत का मगर |
चाह मिलती है तो चाहों का, सिला देता है |
रात भर जागती रहती है, कलेजे में जलन यही तूफान चरागों को, जला देता है |
..कनुप्रिया
खूब रोती है नज़र प्यार, भुला देता है |
वो परिंदे सहम गए हैं अब, नहीं आते |
कि ये इंसान है, ज़ेहराब पिला देता है |
ये मुहब्बत यकीन भी तो, बदगुमानी भी |
दिल डराता है तो चेहरा भी खिला देता है |
दोस्ती हासिल-ए-ईमान, ज़िंदगी का सबक |
कहीं कान्हा को सुदामा से, मिला देता है |
फूँक देता है ये तेज़ाब, मुहब्बत का मगर |
चाह मिलती है तो चाहों का, सिला देता है |
रात भर जागती रहती है, कलेजे में जलन यही तूफान चरागों को, जला देता है |
..कनुप्रिया
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