‘कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया, कुछ बोझ अपना बँट गया,
अच्छा हुआ, तुम मिल गई, कुछ रास्ता ही कट गया,
क्या राह में परिचय कहूँ, राही हमारा नाम है,
चलना हमारा काम है...
’ हालाँकि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ से मेरा परिचय
‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ के माध्यम से हुआ लेकिन
‘सुमन’ जी की उपर्युक्त पंक्तियाँ मेरी सर्वाधिक
प्रिय काव्य पंक्तियों में से एक है। काव्य जगत के
इस पुरोधा के जन्मदिन पर मेरा सर इस
महान कवि के चरणों में सादर विनत है।
महाकवि ‘निराला के निधन पर ‘सुमन’ जी ने
कुछ पंक्तियाँ लिखी थी जो आज उन्ही पर चरितार्थ होती हैं:
'तुम जीवित थे तो सुनने को जी करता था,
तुम चले गए तो गुनने को जी करता है।
तुम सिमटे थे तो सहमी सहमी सासें थी,
तुम बिखर गए तो चुनने को जी करता है।'
अच्छा हुआ, तुम मिल गई, कुछ रास्ता ही कट गया,
क्या राह में परिचय कहूँ, राही हमारा नाम है,
चलना हमारा काम है...
’ हालाँकि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ से मेरा परिचय
‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ के माध्यम से हुआ लेकिन
‘सुमन’ जी की उपर्युक्त पंक्तियाँ मेरी सर्वाधिक
प्रिय काव्य पंक्तियों में से एक है। काव्य जगत के
इस पुरोधा के जन्मदिन पर मेरा सर इस
महान कवि के चरणों में सादर विनत है।
महाकवि ‘निराला के निधन पर ‘सुमन’ जी ने
कुछ पंक्तियाँ लिखी थी जो आज उन्ही पर चरितार्थ होती हैं:
'तुम जीवित थे तो सुनने को जी करता था,
तुम चले गए तो गुनने को जी करता है।
तुम सिमटे थे तो सहमी सहमी सासें थी,
तुम बिखर गए तो चुनने को जी करता है।'
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