Wednesday, 26 August 2015

आपकी उंगली उस सहारे की तरह है पापा

मेरे जीवन ग्रंथ, मेरे कर्मयोगी पिता
आपके लिए आज का एक दिन तो क्या
जीवन भर जश्न मनाऊं तो कम है
कि आपके रूप में ईश्वर का हाथ मेरे सिर पर है

आप वेदों की पवित्रता हो मेरे लिए
जिसमें सजी हैं मेरे पुरखों की परिचय ऋचाएं
आपकी आंखों में साक्षात वह ब्रह्म है
जो पीड़ाओं का पहाड़ ढोकर भी उफ नहीं करता

आप मेरे साथ हैं तो तीनों लोक, चौहदों भुवन मेरे हैं
आप हंसते हैं तो जीवन में मुस्कुराहट बिखर जाती है
आपकी मौजूदगी है तो सुंदर हेमंत और बसंत क्या
चारों दिशाएं, आठो ऋतुएं मेरी बाहों में होती हैं

आप नाराज हो जाएं तो ऐसा लगता है
जीवन के आकाश पर बिजली कड़क उठी हो
अस्तित्व की बुनियाद कमजोर लगने लगती है
आपके टूटने से मेरी उम्मीदें जैसे परास्त होने लगती हैं

आपकी उंगली उस सहारे की तरह है पापा 
जिसके दम पर मेरा जीवन सार्थक होता है 
सचमुच पिता जीवन के हर लम्हे में शामिल हैं आप 
और मां तुम उस हर लम्हे की सुंदर साक्षी हो।

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