गुरु अगर ना होते तो हम सपनों की मंजिल ना पाते,
रहते भटकते अँधियारो में, काम ना आते रिश्ते-नाते,
जिनके प्रयासों से सदा हम संवरे और निखर रहे हैं,
ईश्वर समान उन गुरुओं के चरणों में हम शीश नवाते।'
जिंदगी के इस रंगमंच पर जिन्होंने भी गुरु रूप में अज्ञान के परदे को हटाकर हमें ज्ञान पुंज की सौगात सौंपी है, आज गुरु पूर्णिमा पर उन सभी के चरणों में मेरा सर सादर विनत है।
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