दो गज घूंघट...
भारत मेँ जब चोली के नीचे और चुंदरी के पीछे जैसे गाने बनेगेँ तो क्या होगा?:-)
बहुत खूब बहुत बढिया! जिस भारत की सभ्यता घूघंट करने और करवाने मेँ निहित हो, वहाँ पोर्नोग्राफी देखने मेँ चौथा स्थान क़ाबिले तारीफ है। जहाँ लाइट ठीक से न मिलती हो, वहाँ मोबाइल पर पोर्नोग्राफी देखने मेँ तीसरा स्थान तो और भी गौरवान्वित कराने लायक है। हमने नग्नता मेँ बहुत तरक्की कर ली है। देखिये हम केवल नवदुर्गो मेँ बच्चीओ को कन्या मानते है बाकी अकेले मेँ बच्चीओ की पोर्न साइड अच्छी लगती है। हम बहू भी लाते है पर पर्दा जरुर कराते है। दो गज घूंघट निकालकर खेतो मेँ शौच मेँ हमेँ दिक्कत नही है। वाह! ऐसे लोगो के तो थप्पड़ मारने का भी मन नही करता बल्कि दया आती है। बेशक पोर्न देखता व्यक्तिगत अधिकार हो सकता है पर बच्चो की पोर्न देखना और अव्यस्को का पोर्न देखना उचित है? आपको अच्छा लगेगा कि अभी दूध के दाँत भी नही टूटे और पोर्न साइड देखे बच्चे। जिस उम्र मेँ बुजुर्ग संस्कार देते है, उस उम्र मेँ ये बीजारोपण किया जा रहा है।
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